बिलासपुर में पुरी जैसी धूम: 20 फीट ऊंचे रथ पर सवार होकर मौसी मां के घर रवाना हुए महाप्रभु जगन्नाथ; SECL डायरेक्टर ने निभाई ‘छेरा पहरा’ की रस्म

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drnewsindia.com

Bilaspur Desk (16 July 2026): न्यायधानी बिलासपुर के रेलवे क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ मंदिर में आज आस्था, श्रद्धा और उत्सव का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा। ओडिशा के पुरी की विश्वप्रसिद्ध तर्ज पर बिलासपुर में भी महाप्रभु जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की भव्य रथयात्रा पूरी गरिमा के साथ निकाली गई।

20 फीट ऊंचे दिव्य और सुसज्जित लकड़ी के रथ पर सवार होकर त्रिमूर्ति नौ दिवसीय प्रवास के लिए मौसी मां मंदिर (गुंडिचा मंदिर) के लिए रवाना हुई। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने और भगवान के रथ की डोर थामने के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ सड़कों पर उतर आई।

📌 बिलासपुर रथयात्रा के मुख्य आकर्षण (Key Highlights)

  • 🎡 20 फीट ऊंचा दिव्य रथ: बिलासपुर का सबसे भव्य पारंपरिक रथ, जिसे खींचने के लिए भक्तों में होड़ मची रही।
  • 🧹 छेरा पहरा की पावन रस्म: SECL के निदेशक रमेशचंद्र महापात्र ने निभाई राजा की भूमिका, रथ के आगे लगाया झाड़ू।
  • ⛩️ 9 दिनों का प्रवास: महाप्रभु जगन्नाथ 7 दिनों तक अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) में विश्राम करेंगे।
  • ऐतिहासिक वापसी: आगामी 24 जुलाई 2026 को ‘बहुड़ा यात्रा’ (उल्टी रथयात्रा) के जरिए भगवान पुनः मुख्य मंदिर लौटेंगे।

🚨 दोपहर 3 बजे शुरू हुआ उत्सव: राजा के स्वरूप में SECL डायरेक्टर ने बुहारी राह

बिलासपुर की इस रथयात्रा का सबसे मुख्य और पवित्र आकर्षण दोपहर करीब 3 बजे आयोजित होने वाली ‘छेरा पहरा’ की रस्म रही।

प्रभु के सेवक बने अधिकारी: पुरी की राजशाही परंपरा का निर्वहन करते हुए इस वर्ष एसईसीएल (SECL) के निदेशक श्री रमेशचंद्र महापात्र ने राजा के स्वरूप में यह रस्म निभाई। उन्होंने सोने की झाड़ू से भगवान के रथ के सामने की भूमि को साफ किया और पूजा-अर्चना कर यह संदेश दिया कि भगवान के सामने हर इंसान केवल एक सेवक है। इस रस्म के पूर्ण होते ही शंखनाद और ढोल-नगाड़ों के साथ रथ को आगे खींचा गया।

🕌 मौसी मां मंदिर में 7 दिनों तक मेहमाननवाज़ी का लुत्फ उठाएंगे भगवान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रथयात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ मौसी मां के मंदिर पहुंच चुके हैं।

  • विश्राम काल: भगवान यहां अगले 7 दिनों तक विश्राम करेंगे, जहां उन्हें विशेष प्रकार के पकवान (पोड़ा पीठा) और प्रसादी का भोग लगाया जाएगा।
  • अटूट मान्यता: बिलासपुर अंचल में यह दृढ़ मान्यता है कि इस नौ दिवसीय उत्सव के दौरान जो भी श्रद्धालु भगवान के रथ का स्पर्श करता है या उसकी रस्सी को एक बार भी खींच लेता है, उसे सौ यज्ञों के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

🗣️ ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष से गूंज उठी न्यायधानी

जैसे ही रथ मुख्य मंदिर के सिंहद्वार से बाहर निकला, पूरा बिलासपुर शहर ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरे कृष्णा’ के नारों से सराबोर हो गया।

  • आकर्षक साज-सज्जा: रेलवे क्षेत्र के जगन्नाथ मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी लाइटों, गेंदे के फूलों और विशेष ध्वज-पताकाओं से दुल्हन की तरह सजाया गया था।
  • सेवा स्टॉल्स: भीषण उमस और गर्मी को देखते हुए पूरे यात्रा मार्ग में विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए ठंडे पानी, शर्बत और महाप्रसाद की विशेष व्यवस्था की गई थी।

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