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Crime & Investigation Desk (17 July 2026): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के इंदौर सब-जोनल कार्यालय ने मध्य प्रदेश के इंदौर और मंदसौर सहित देश के कई राज्यों में एक साथ बड़ा तलाशी अभियान चलाया है। 70 करोड़ रुपए मूल्य की करीब 70 किलोग्राम एमडीएमए (मेफेड्रोन) ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़े इस मामले में ईडी को बड़ी सफलता हाथ लगी है।
कार्रवाई के दौरान ईडी ने कई महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और अपराध से जुड़े साक्ष्य जब्त किए हैं, जिससे इस ड्रग नेटवर्क के वित्तीय साम्राज्य (मनी ट्रेल) का पर्दाफाश होने की उम्मीद है।
📌 ED की बड़ी कार्रवाई के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- 🚔 कार्रवाई का आधार: इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज 70 किलोग्राम एमडीएमए ड्रग्स तस्करी की एफआईआर (FIR) के बाद ईडी ने शुरू की थी जांच।
- 📡 आधुनिक ट्रैकिंग: फरार मुख्य आरोपी को पकड़ने के लिए ईडी ने हैदराबाद, बीकानेर और इंदौर में तकनीकी निगरानी रखी और इंदौर के गुप्त ठिकाने से उसे दबोचा।
- 📂 दस्तावेज व डिवाइस जब्त: मनी लॉन्ड्रिंग के सुराग तलाशने के लिए कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।
- 🔐 बैंक लॉकर का खुलासा: जांच के दौरान एक आरोपी के रिश्तेदार के नाम पर संचालित गुप्त बैंक लॉकर की जानकारी भी सामने आई है।

🕸️ हैदराबाद से बीकानेर तक फैला था जाल, ऐसे शिकंजे में आया मुख्य आरोपी
यह मामला पूरी तरह हाई-टेक और बड़े वित्तीय नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। ईडी की टीम ने इस सिंडिकेट के मुख्य खिलाड़ी को पकड़ने के लिए कड़ी मशक्कत की है:
लगातार निगरानी: मामले का मुख्य आरोपी एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही अपने पुराने ठिकानों से फरार था। ईडी ने खुफिया सूचनाओं और एडवांस सर्विलांस तकनीकों की मदद से कई दिनों तक हैदराबाद, बीकानेर और इंदौर में उसकी हरकतों पर पैनी नजर रखी। आखिरकार आरोपी के इंदौर में होने की सटीक लोकेशन मिलते ही ईडी ने घेराबंदी कर उसे दबोच लिया और उसके ठिकानों पर धावा बोल दिया।
⚖️ NDPS एक्ट के तहत दर्ज था मामला, अब मनी लॉन्ड्रिंग पर शिकंजा
यह पूरी जांच इंदौर पुलिस की प्राथमिक कार्रवाई के बाद मनी लॉन्ड्रिंग के नजरिए से शुरू की गई थी:
- कानूनी धाराएं: मुख्य मामला नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 की धारा 8 और 22 के तहत दर्ज किया गया था।
- मनी ट्रेल की जांच: ड्रग्स बेचकर कमाए गए करोड़ों रुपए (अपराध की कमाई) को कहां और कैसे खपाया गया, इसका पता लगाने के लिए ईडी ने आरोपियों के वित्तीय नेटवर्क, बेनामी संपत्तियों और बैंक खातों की सघन जांच शुरू कर दी है।

💼 रिश्तेदार के बैंक लॉकर से खुलेंगे बड़े राज
ईडी की छापेमारी के दौरान एक बेहद महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगा है।
- बेनामी लॉकर: टीम को पता चला है कि एक आरोपी ने अपने रिश्तेदार के नाम पर बैंक में लॉकर ले रखा था। इस लॉकर को फ्रीज कर दिया गया है और अब इसकी अलग से तलाशी लेकर जब्ती की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। ईडी को अंदेशा है कि इस लॉकर में ड्रग मनी से खरीदे गए सोने या अन्य बेनामी संपत्तियों के कागजात मिल सकते हैं।




