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इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के हीरानगर इलाके में एक छात्र के साथ ऑनलाइन साइबर ठगी का बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। शातिर जालसाजों ने खुद को एक नामी फाइनेंस कंपनी का सीनियर अधिकारी बताकर छात्र को बेहद आसान किस्तों पर लोन दिलाने का झांसा दिया। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, जीएसटी और रिफंड ट्रांसफर के नाम पर झांसा देकर छात्र के खाते से कुल 1 लाख 25 हजार रुपए उड़ा लिए।
ठगी का अहसास होने पर पीड़ित छात्र ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर हीरानगर पुलिस ने शनिवार को अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
📱 फेसबुक पर आया था मैसेज, ऐसे शुरू हुआ ठगी का खेल
हीरानगर पुलिस के मुताबिक, मारुति नगर निवासी अनिरुद्ध भदौरिया प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) की तैयारी कर रहा है। ठगी की पूरी क्रोनोलॉजी इस प्रकार रही:
- 18 जून को पहला संपर्क: अनिरुद्ध की फेसबुक आईडी पर अचानक एक पर्सनल लोन का आकर्षक ऑफर और आवेदन करने के लिए एक अज्ञात लिंक आई। छात्र ने जैसे ही उस लिंक पर क्लिक कर अपना मोबाइल नंबर दर्ज किया, उसका डेटा ठगों के पास पहुंच गया।
- व्हाट्सएप पर मंगाए दस्तावेज: कुछ ही देर बाद एक अनजान नंबर से अनिरुद्ध को कॉल आया। कॉलर ने खुद को बैंक अधिकारी बताते हुए व्हाट्सएप पर छात्र के सभी पर्सनल दस्तावेज, बैंक अकाउंट डिटेल्स और तस्वीरें मंगवा लीं।
- फर्जी अप्रूवल लेटर: दस्तावेज मिलते ही ठगों ने छात्र को झांसा देने के लिए एक लाख रुपए का ‘लोन स्वीकृत’ (Loan Approved) होने का मैसेज भेजा। इसके साथ ही व्हाट्सएप पर एक बकायदा लेटर पैड भेजा गया, जिस पर प्रतिष्ठित कंपनी ‘इंडियाबुल्स धानी फाइनेंस’ का नाम और लोगो लगा हुआ था।

💸 10 मिनट में लोन का झांसा देकर 1.25 लाख ऐंठे
लोन पास होने का फर्जी भरोसा दिलाकर आरोपियों ने ठगी की रकम ऐंठना शुरू किया:
- प्रोसेसिंग चार्ज: सबसे पहले सीनियर अधिकारियों से बात कराने और फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर यूपीआई (UPI) के जरिए ₹2,250 जमा कराए गए।
- क्यूआर कोड स्कैम: 19 जून को दोबारा कॉल कर आरोपियों ने झांसा दिया कि अगले 10 मिनट में लोन के 1 लाख रुपए खाते में आ जाएंगे। इसके लिए उन्होंने एक क्यूआर स्कैनर (QR Code) भेजा और अतिरिक्त चार्ज जमा करवा लिया।
- रिफंड और जीएसटी का खेल: जब पैसे ट्रांसफर नहीं हुए, तो ठगों ने कहा कि सिस्टम एरर के कारण पैसे फंस गए हैं। पूरा पैसा वापस पाने (Refund) के लिए उन्हें जीएसटी और अन्य सरकारी शुल्क चुकाने होंगे।
- लोन कैंसिल करने पर भी वसूली: हद तो तब हो गई जब सोमवार को पीड़ित छात्र ने परेशान होकर लोन निरस्त (Cancel) करने की बात कही, तो ठगों ने लोन कैंसिलेशन चार्ज के नाम पर भी मोटी रकम वसूल ली। इस तरह लोन के 1 लाख रुपए मिलने के बजाय छात्र के खुद के ₹1.25 लाख डूब गए।

🚨 साइबर एक्सपर्ट्स की सलाह: ऑनलाइन लोन लेते समय बरतें ये सावधानियां
आपकी वेबसाइट के पाठकों को इस प्रकार की ठगी से बचाने के लिए यह बेहद जरूरी गाइडलाइन:
- सोशल मीडिया विज्ञापनों से बचें: फेसबुक, इंस्टाग्राम या टेलीग्राम पर दिखने वाले “बिना सिबिल स्कोर, तुरंत लोन” वाले लुभावने विज्ञापनों और लिंक्स पर कभी क्लिक न करें।
- व्हाट्सएप पर न भेजें दस्तावेज: कोई भी प्रामाणिक बैंक या फाइनेंस कंपनी कभी भी व्हाट्सएप पर आपके निजी दस्तावेज (पैन, बैंक स्टेटमेंट) या ओटीपी नहीं मांगती।
- एडवांस पेमेंट कभी न करें: आरबीआई (RBI) के नियमों के मुताबिक, कोई भी लोन देने से पहले एडवांस में प्रोसेसिंग फीस या सिक्योरिटी मनी कैश/यूपीआई में नहीं मांग सकता। लोन की फीस हमेशा स्वीकृत लोन राशि से कटकर ही आती है।
- यहाँ करें तुरंत शिकायत: यदि आप किसी भी प्रकार के ऑनलाइन वित्तीय फ्रॉड का शिकार होते हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ पर कॉल करें या
cybercrime.gov.inपर शिकायत दर्ज कराएं।




