drnewsindia.com / सीहोर। जिला प्रशासन की नाक के ठीक नीचे और आला अधिकारियों के रोज के आवागमन वाले रास्ते पर सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ती नजर आईं। सीहोर कलेक्टर कार्यालय के ठीक सामने स्थित बिजली ट्रांसफार्मर पर विद्युत कंपनी के कर्मचारी बिना किसी सुरक्षा उपकरण (Safety Equipment) के जान जोखिम में डालकर काम करते देखे गए।
यह घटना उस संवेदनशील इलाके की है, जहां से पूरे जिले की कानून और प्रशासनिक व्यवस्थाएं संचालित होती हैं। ऐसे में यह लापरवाही बिजली कंपनी के दावों और प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े करती है।
क्या हैं सुरक्षा नियम और कानून?
विद्युत कंपनी और श्रम विभाग के कड़े नियमों के मुताबिक, हाई-वोल्टेज लाइन या ट्रांसफार्मर पर काम करते समय कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कड़े मापदंड तय हैं:
अनिवार्य सुरक्षा मानक:
- सेफ्टी किट: काम के दौरान इंसुलेटेड ग्लव्स (दस्ताने), सेफ्टी हेलमेट, रबर के जूते और ऊंचाई पर काम करने के लिए लाइफ-लाइन या सेफ्टी बेल्ट होना अनिवार्य है।
- कानूनी प्रक्रिया: काम शुरू करने से पहले संबंधित लाइन को पूरी तरह डिस्चार्ज करना और ‘परमिट टू वर्क’ (PTW) लेना कानूनी रूप से जरूरी है।

लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। कलेक्टर कार्यालय के सामने काम कर रहे ये लाइनमैन बिना दस्ताने, बिना हेलमेट और बिना सेफ्टी बेल्ट के पोल पर चढ़े हुए थे।
बड़ा सवाल: हादसे का जिम्मेदार कौन?
अक्सर देखा गया है कि जब भी कोई अप्रिय घटना या करंट लगने से किसी कर्मचारी की मौत होती है, तो विद्युत कंपनी सारा ठीकरा कर्मचारियों की ‘असावधानी’ पर फोड़ देती है। लेकिन यहाँ सवाल यह उठता है कि:
- क्या कंपनी के पास अपने मैदानी कर्मचारियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं हैं?
- क्या ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों द्वारा केवल कागजों पर ही सुरक्षा नियमों का पालन कराया जा रहा है?

डीई (DE) बोले– “यह गलत है, जांच करवाएंगे”
इस गंभीर लापरवाही के मामले पर जब एमपीईबी (MPEB) के डीई अंकित पालीवाल से बात की गई, तो उन्होंने कहा—
“हमारे द्वारा सभी कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण पहनने के संबंध में पहले ही लिखित पत्र जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद यदि कोई कर्मचारी लापरवाही कर रहा है या नियमों की अनदेखी कर रहा है, तो यह पूरी तरह गलत है। इस मामले की गंभीरता से जांच करवाई जाएगी।”





