छतरपुर (मध्य प्रदेश): केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों का आंदोलन उग्र होता जा रहा है। शुक्रवार को आंदोलन के 8वें दिन महिलाओं ने चिता पर लेटकर और सांकेतिक फांसी लगाकर ‘फांसी सत्याग्रह’ की शुरुआत की। इसके साथ ही प्रभावितों का आमरण अनशन भी 5वें दिन में प्रवेश कर चुका है।
मुख्य बिंदु:
- कानून का उल्लंघन: आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने भू-अर्जन कानून 2013 (धारा 38) का हवाला देते हुए कहा कि जब तक सभी प्रभावितों को पूरा मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक जमीन और मकानों का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता।
- प्रशासन पर लापरवाही का आरोप: प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आमरण अनशन के 5 दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने अनशनकारियों का मेडिकल परीक्षण तक नहीं कराया है।
- अधिकारियों से वार्ता: आंदोलन के 8वें दिन पन्ना और छतरपुर जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से चर्चा की।

आंदोलनकारियों की चेतावनी: जब तक मझगांय, रूंझ और नेगुवा समेत सभी प्रभावित गांवों के परिवारों को उचित मुआवजा नहीं मिलता और कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक जल, मिट्टी और फांसी सत्याग्रह जारी रहेगा।




