गुना: भैंसाना में 11 दिवसीय श्रीराम महायज्ञ शुरू; कलश यात्रा में उमड़े 25 हजार श्रद्धालु, आशुतोष राणा और दिग्विजय सिंह ने दी आहुति

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राघौगढ़ (गुना)। गुना जिले के राघौगढ़ इलाके के भैंसाना गांव में सोमवार से भव्य 11 दिवसीय श्रीराम महायज्ञ का शंखनाद हो चुका है। आयोजन के पहले ही दिन आस्था का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि तूमन खेड़ी से भैंसाना गांव तक की सड़कें श्रद्धालुओं से पट गईं। इस भव्य कलश यात्रा में 25 हजार से ज्यादा श्रद्धालु शामिल हुए, जहां पुरुष अपने सिर पर श्रीमद्भागवत जी और महिलाएं मंगल कलश धारण कर पैदल चल रही थीं।

सोमवार देर शाम बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता आशुतोष राणा, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह ने महायज्ञ में शिरकत की। तीनों नेताओं और अभिनेता ने यज्ञशाला की परिक्रमा कर आहुतियां दीं और भगवान श्रीराम की महाआरती में भाग लिया।

🗣️ आशुतोष राणा का बड़ा बयान: “हमारा शरीर ही ‘दशरथ’ है, तय हमें करना है कि हम कहाँ जा रहे हैं”

यज्ञ स्थल पर मौजूद जनसमुदाय को संबोधित करते हुए प्रख्यात अभिनेता आशुतोष राणा ने भगवान राम के चरित्र और मानव जीवन के गहरे संबंध को बेहद सरल शब्दों में समझाया:

  • दशमुख बनाम दशरथ: उन्होंने कहा, “हमारे भीतर दशरथ भी हैं और दशमुख (रावण) भी। यह हम पर निर्भर करता है कि हम दशरथ की ओर यात्रा करते हैं या दशानन की ओर। हमारी पांच ज्ञानेंद्रियां और पांच कर्मेंद्रियां, यानी यह 10 इंद्रियों से बना शरीर ही ‘दशरथ’ कहलाता है।”
  • राम का धरा पर आगमन: राणा ने आगे कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम निराकार से साकार रूप में इस बिरादरी में आए ही इसलिए थे ताकि वह हमें नीचे से ऊपर उठा सकें। अब यह हमारे ऊपर है कि हम उनके चित्र, चरित्र और चिंतन से खुद को कितना ऊपर उठाते हैं।

🔱 “महादेव ने सब कुछ बांट दिया, पर अपने पास सिर्फ ‘राम’ नाम रखा”

भगवान शिव की महिमा का बखान करते हुए आशुतोष राणा ने अपनी चिरपरिचित शैली में कहा कि महादेव इतने विलक्षण हैं कि जो उन्हें बनाता है, वह उसी के हो जाते हैं।

“जब श्रीराम ने उन्हें बनाया तो वह ‘रामेश्वर’ हो गए और जब हमारे प्रिय भाई जयवर्धन ने उनका निर्माण कराया तो वे ‘जयवर्द्धनेश्वर महादेव’ हो गए। महादेव ने अपनी सारी संपत्ति दुनिया में बांट दी, लेकिन अपने पास केवल दो अक्षर की पूंजी रखी— ‘रा’ और ‘म’। इसी राम नाम की शक्ति थी कि भयंकर हलाहल विष भी उनके कंठ में रुक गया और वे नीलकंठ कहलाए।”

उन्होंने जीवन का एक बड़ा सूत्र देते हुए कहा कि जब भी कोई अमृत (सुख) पाने की कोशिश करता है, तो सबसे पहले विष (कठिनाइयां) ही बाहर आता है। जो उस विष को सह लेता है, वही असली अमृत तक पहुँचता है।

🎭 पूर्व CM दिग्विजय सिंह ने बांधे तारीफों के पुल: “अद्भुत है राणा का ‘हमारे राम’ नाटक”

मंच से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आशुतोष राणा का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने राणा की तारीफ करते हुए कहा:

  • आशुतोष राणा आज के समय में संस्कार और संस्कृति के क्षेत्र के बहुत बड़े हस्ताक्षर हैं।
  • इन दिनों आशुतोष राणा का ‘हमारे राम’ नाम का नाटक देश भर में काफी चर्चाओं में है, जिसमें वह स्वयं ‘रावण’ का जीवंत पात्र निभा रहे हैं।
  • दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने बीते दिनों ग्वालियर में यह नाटक खुद देखा, जो कि वाकई अद्भुत और अकल्पनीय है।

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