drnewsindia.com/ नई दिल्ली
डिब्बा बंद और पैकेज्ड फूड (Packaged Food) खरीदने से पहले अब ग्राहकों को यह आसानी से पता चल सकेगा कि प्रोडक्ट उनकी सेहत के लिए कितना सही है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा पेश कर पैकेज्ड फूड पर ‘Front-of-Pack Labeling’ (FOPL) लागू करने का प्रस्ताव दिया है।
इसके तहत, जिन खाद्य पदार्थों में नमक, चीनी या सैचुरेटेड फैट की मात्रा तय सीमा से अधिक होगी, उनके पैकेट के सामने (Front Panel) लाल रंग का चेतावनी लेबल लगाया जाएगा।
📌 FSSAI के नए प्रस्ताव की 5 बड़ी बातें
- रेड हेक्सागोनल लेबल: तय सीमा से अधिक चीनी, नमक या फैट वाले प्रोडक्ट्स पर सामने की तरफ लाल रंग का 6 कोनों वाला (Hexagonal) चेतावनी निशान और क्लियर वॉर्निंग लिखी होगी।
- ICMR-NIN के मानक: प्रोडक्ट अस्वस्थ (HFSS – High Fat, Sugar, Salt) है या नहीं, इसका फैसला ICMR-National Institute of Nutrition की ‘डायट्री गाइडलाइंस फॉर इंडियंस, 2024’ के आधार पर होगा।
- दो चरणों में लागू करने की योजना:
- फेज 1: पहले चरण में उन प्रोडक्ट्स पर लाल निशान लगेगा जिनमें फैट, शुगर या साल्ट में से कोई दो या दो से अधिक चीजें सीमा से ज्यादा होंगी (स्वीट कोल्ड ड्रिंक्स शामिल)।
- फेज 2: दूसरे चरण में यह नियम उन प्रोडक्ट्स पर भी लागू होगा जिनमें इनमें से कोई एक चीज भी सीमा से ज्यादा होगी।
- इन प्रोडक्ट्स को मिलेगी छूट: शुद्ध घी, एडिबल ऑयल (खाद्य तेल), साधारण नमक, चीनी, गुड़ और शहद जैसे सिंगल-इंग्रीडिएंट व प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को इस वार्निंग लेबल से बाहर रखा जाएगा।
- सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद कदम: ‘3S एंड अवर हेल्थ सोसाइटी’ की याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने FSSAI को देरी के लिए फटकार लगाई थी, जिसके बाद यह हलफनामा दाखिल किया गया।
🔍 ‘Front of Pack Labeling’ (FOPL) क्यों जरूरी है?
- आसान और त्वरित पहचान: पैकेज्ड फूड के पीछे लिखे बारीक और जटिल न्यूट्रिशनल चार्ट को पढ़ने के बजाय ग्राहक पैकेट के सामने लगे सिंबल से तुरंत समझ पाएंगे कि खाना हेल्दी है या नहीं।
- बच्चों और परिवारों की सुरक्षा: अनजाने में अत्यधिक अस्वस्थ चीजें (Junk/Ultra-processed Food) खरीदने पर रोक लगेगी।
- लाइफस्टाइल बीमारियों पर लगाम: देश में तेजी से बढ़ रहे मोटापा, डायबिटीज और हार्ट डिसीज (हृदय रोग) के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी।
💡 समझें फैट का गणित: सैचुरेटेड बनाम अनसैचुरेटेड फैट
- सैचुरेटेड फैट (नुकसानदायक): यह घी, मक्खन, मलाई, पनीर, फैटी मीट और नारियल तेल से बने प्रोडक्ट्स में अधिक होता है। इसका ज्यादा सेवन शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ाता है।
- अनसैचुरेटेड फैट (स्वास्थ्यवर्धक): मूंगफली, बादाम, अखरोट, तिल, सरसों, जैतून के तेल और मछली में पाया जाता है। सही मात्रा में इसका सेवन दिल की सेहत के लिए बेहतर माना जाता है।




