drnewsindia.com / बिजनेस | डिजिटल डेस्क: केंद्र सरकार द्वारा अपने बफर स्टॉक से महज ₹35 प्रति किलो की सस्ती दर पर प्याज उपलब्ध कराए जाने के बावजूद खुदरा बाजार में इसके दामों में तेजी जारी है। 28 अगस्त से देश के 17 प्रमुख शहरों में शुरू हुई इस रियायती बिक्री के बावजूद, राष्ट्रीय स्तर पर प्याज का औसत खुदरा भाव ₹48.5 प्रति किलो से बढ़कर ₹50.79 प्रति किलो पर पहुँच गया है।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, योजना की शुरुआत के 10 दिनों के भीतर ही 4,000 टन से अधिक बफर प्याज बेचा जा चुका है, लेकिन बड़े महानगरों में कीमतें अब भी काफी ऊंची बनी हुई हैं।
📈 प्रमुख शहरों में प्याज के खुदरा एवं थोक भाव
5 सितंबर को देश के मेट्रो शहरों और प्रमुख केंद्रों पर प्याज की कीमतों में बड़ा अंतर दर्ज किया गया:
| शहर / स्तर | प्याज का खुदरा भाव (प्रति किलो) |
| दिल्ली (Delhi) | ₹65 |
| चेन्नई (Chennai) | ₹63 |
| मुंबई (Mumbai) | ₹53 |
| रांची (Ranchi) | ₹40 |
| राष्ट्रीय औसत थोक भाव | ₹42.79 |

🚛 ‘कांदा एक्सप्रेस’ और मोबाइल वैन से की जा रही सप्लाई
सरकार वर्ष 2026 के लिए बनाए गए अपने 1.21 लाख टन के बफर स्टॉक में से प्याज बाजार में उतार रही है। यह वितरण नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (NCCF) और नैफेड (NAFED) के माध्यम से किया जा रहा है:
- विशेष मालगाड़ी ‘कांदा एक्सप्रेस’: उत्पादक क्षेत्रों (जैसे नासिक) से सीधे उच्च मांग वाले शहरों तक तेजी से सप्लाई पहुँचाने के लिए भारतीय रेलवे की विशेष ‘कांदा एक्सप्रेस’ ट्रेनों और ट्रकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- मोबाइल वैन से रिटेल बिक्री: दिल्ली-एनसीआर, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, केरल, राजस्थान, पंजाब और ओडिशा में मोबाइल वैन और सोसायटियों के माध्यम से सीधे उपभोक्ताओं को ₹35 प्रति किलो की दर पर प्याज बेचा जा रहा है।
- 1,500 टन बिक्री का दावा: NCCF के प्रबंध निदेशक अनिस जोसेफ चंद्रा के अनुसार, केवल उनकी एजेंसी ने अब तक विभिन्न शहरों में 1,500 टन बफर प्याज की बिक्री कर ली है।
❓ क्यों बढ़ रहे हैं दाम और कब मिलेगी स्थाई राहत?
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बताया कि चालू वर्ष में रबी सीजन की फसल की कटाई के दौरान हुई बेमौसम बारिश से प्याज की गुणवत्ता और भंडारण क्षमता को नुकसान पहुँचा था। रबी फसल का प्याज ही सालभर स्टोर करके रखा जाता है।
- राहत की उम्मीद: सरकार को खरीफ सीजन की नई फसल की आवक से बड़ी उम्मीदें हैं। अक्टूबर के मध्य से मंडियों में नई फसल पहुँचनी शुरू हो जाएगी, जिससे सप्लाई में इजाफा होगा और बढ़ती कीमतों से स्थायी रूप से राहत मिल सकेगी।

💡 नॉलेज बॉक्स: कांदा एक्सप्रेस और बफर स्टॉक
- कांदा एक्सप्रेस: भारतीय रेलवे की विशेष पार्सल/मालगाड़ी, जिसे प्याज उत्पादक केंद्रों से सीधे बड़े खपत वाले शहरों तक तेज और सुगम आपूर्ति के लिए संचालित किया जाता है।
- बफर स्टॉक का गणित: ऑफ-सीजन में बाजार में प्याज की किल्लत और अनियंत्रित महंगाई को रोकने के लिए सरकार आपातकालीन बैकअप के तौर पर 1.21 लाख टन प्याज सुरक्षित रिजर्व रखती है।




