drnewsindia.com / सीहोर | डिजिटल डेस्क: जिला मुख्यालय के समीपस्थ विश्व प्रसिद्ध कुबेरेश्वरधाम पर आयोजित पांच दिवसीय ऑनलाइन ‘हरतालिका तीज शिव महापुराण कथा’ का रविवार को भव्य विराम हुआ। कथा के अंतिम दिन अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि अटूट गुरु भक्ति, दृढ़ संकल्प और भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास मनुष्य के जीवन की दिशा और भाग्य दोनों बदल सकता है।
💧 “एक लोटा जल अर्पित करना केवल धार्मिक क्रिया नहीं, समर्पण का प्रतीक”
पंडित प्रदीप मिश्रा ने सनातन परंपरा और मनुष्य जीवन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:
- दुर्लभ मनुष्य योनि: लाखों योनियों के बाद मनुष्य जीवन मिलता है, जहाँ व्यक्ति को भगवान शिव को श्रद्धा के साथ एक लोटा जल अर्पित करने का सौभाग्य प्राप्त होता है।
- आत्मबल का संचार: जब मनुष्य सच्चे भाव से महादेव का स्मरण करता है, तो उसके भीतर अपार विश्वास और आत्मबल का संचार होता है, जो सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

🛕 12 ज्योतिर्लिंगों की महिमा का वर्णन और गुरुकुल परंपरा
कथा के पांचवें एवं अंतिम दिन पंडित मिश्रा ने कई महत्वपूर्ण धार्मिक व सामाजिक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया:
| प्रमुख विषय | कथा वाचक पं. प्रदीप मिश्रा के विचार / संदेश |
| हरतालिका तीज व्रत | यह केवल व्रत नहीं, बल्कि अटूट श्रद्धा और संकल्प का पर्व है। इसके माध्यम से महिलाएं परिवार के मंगल की कामना करती हैं। |
| 12 ज्योतिर्लिंग | देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि कुबेरेश्वरधाम भी करोड़ों शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। |
| गुरुकुल परंपरा | प्राचीन गुरुकुल व्यवस्था में श्रीराम, श्रीकृष्ण और सुदामा सब समान थे। वहां ऊंच-नीच का भेद नहीं था और शिष्यों को श्रम व अनुशासन के संस्कार मिलते थे। |

💼 युवाओं को सफलता का मूलमंत्र: “काम छोटा-बड़ा नहीं होता, शुरुआत करें”
मार्गदर्शन की चाह रखने वाले युवाओं को प्रेरित करते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा:
“जीवन में कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। युवाओं को किसी भी कार्य की शुरुआत करने से घबराना नहीं चाहिए। हर बड़े लक्ष्य की शुरुआत छोटे स्तर से ही होती है। निरंतर मेहनत, दृढ़ संकल्प और धैर्य से ही बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।”

🌐 देश-विदेश से ऑनलाइन जुड़े लाखों श्रद्धालु
कुबेरेश्वरधाम पर आयोजित इस पांच दिवसीय हरतालिका तीज शिव महापुराण कथा का प्रसारण ऑनलाइन माध्यमों से किया गया, जिससे भारत सहित विदेशों में बसे लाखों शिवभक्तों ने घर बैठे कथा का आनंद लिया। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने धर्म, भक्ति और समाज सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।




