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कोलकाता: भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा को और अधिक चाक-चौबंद करने की दिशा में एक बहुत बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने सीमा पर नई चौकियां (Outposts) स्थापित करने और कांटेदार तार की बाड़ (Barbed Wire Fencing) लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को 142.79 एकड़ जमीन आधिकारिक तौर पर सौंप दी है।
यह कदम सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ और तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लगाने में गेम-चेंजर साबित होगा।
कैबिनेट के ’45-डेज चैलेंज’ का हिस्सा
यह त्वरित कार्रवाई हवा में नहीं हुई है, बल्कि इसके पीछे एक ठोस सरकारी नीति है:
- मंत्रिमंडल का बड़ा फैसला: 11 मई को हुई भारतीय जनता पार्टी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया था।
- क्या है लक्ष्य? इसके तहत सीमा पर बाड़ लगाने और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 45 दिनों के भीतर कुल 600 एकड़ जमीन हस्तांतरित की जानी है। 142.79 एकड़ जमीन का यह ट्रांसफर इसी का एक अहम हिस्सा है।
- पहले चरण की कड़ियां: इससे पहले 20 मई को पहले चरण के तहत पांच जिलों में खरीदी गई 43 एकड़ जमीन और निहित (Vested) 31.9 एकड़ जमीन के स्वीकृति आदेश BSF को सौंपे जा चुके हैं।

9 जिलों का विस्तृत चार्ट और सीमा का गणित
मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर इस महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बेहद गहन उपाय शुरू किए हैं। इसके साथ ही उन्होंने नौ जिलों में BSF को ट्रांसफर की गई जमीन का पूरा विस्तृत चार्ट भी पब्लिक किया।
भारत-बांग्लादेश सीमा: एक नज़र में
- कुल सीमा लंबाई: 2,217 किलोमीटर (भारत के साथ लगने वाली किसी भी देश की सबसे लंबी सीमा)।
- बाड़ लग चुकी है: लगभग 1,600 किलोमीटर हिस्सा पहले से सुरक्षित है।
- बाड़ लगना बाकी है: लगभग 600 किलोमीटर हिस्सा अभी भी बिना बाड़ के है, जिसे अब तेजी से कवर किया जा रहा है।

“पश्चिम बंगाल सरकार ने BSF चौकियों और कांटेदार तार की बाड़ के निर्माण को तेज गति देकर सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। इससे हमारे सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा का स्तर और ज्यादा मजबूत होगा।”
— सुभेंदु अधिकारी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल





