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नई दिल्ली। वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत और जापान के बीच की ऐतिहासिक दोस्ती आज एक नए और बेहद मजबूत दौर में प्रवेश कर गई है। जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री साने ताकाइची अपने पहले आधिकारिक भारत दौरे पर बुधवार को नई दिल्ली पहुँचीं, जहाँ राष्ट्रपति भवन में उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया।
इसके बाद हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पीएम ताकाइची के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई। दोनों देशों ने आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार देते हुए 129 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं।
🔥 इस महा-बैठक की 5 सबसे बड़ी बातें:
- रुपए-येन में डायरेक्ट बिजनेस: भारत और जापान अब अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करते हुए सीधे अपनी स्थानीय मुद्राओं (रुपए और येन) में व्यापार करने की तैयारी में हैं। इसके लिए जापानी कंपनियां भारतीय बैंकों में विशेष खाते खोल सकेंगी।
- ‘जापान बिजनेस वीक’ की शुरुआत: जापानी निवेशकों की समस्याओं को ऑन-द-स्पॉट दूर करने के लिए पीएमओ (PMO) के सीनियर अधिकारी सीधे विदेशी निवेशकों से संवाद करेंगे।
- 10 ट्रिलियन येन का बड़ा लक्ष्य: अगले 10 वर्षों में भारत में 10 ट्रिलियन येन (करीब 5.9 लाख करोड़ रुपए) के जापानी निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
- 1000 बायोगैस और खाद कारखाने: ‘इंडिया-जापान बायोगैस इनिशिएटिव’ के तहत देश के गांवों में 1000 बायोगैस और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर प्लांट लगाए जाएंगे।
- मारुति सुजुकी के नए प्लांट का उद्घाटन: दोनों नेताओं ने हरियाणा के खरखौदा में मारुति सुजुकी के चौथे वाहन निर्माण संयंत्र (Plant) का वर्चुअली उद्घाटन किया।
‘मोदी मेरे बड़े भाई जैसे’– रिश्तों में दिखी पारिवारिक गर्मजोशी
संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान दोनों नेताओं के बीच गजब का तालमेल और आत्मीयता देखने को मिली। पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची को अपनी ‘छोटी बहन’ कहकर पुकारा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ताकाइची जापान के ‘नारा’ प्रांत से आती हैं, जो भारत और जापान की साझा बौद्ध विरासत का एक बहुत बड़ा केंद्र है।
जवाब में पीएम साने ताकाइची ने भावुक होते हुए कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरे बड़े भाई जैसे हैं। हम दोनों देशों के रिश्तों को इसी तरह भाई-बहन के स्नेह के साथ आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।”

LIVE UPDATES: भारत-जापान आर्थिक मंच के बड़े फैसले
💰 बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए ₹88 हजार करोड़ का जापानी लोन
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना (अनुमानित लागत ₹2 लाख करोड़) के लिए जापान की सरकारी एजेंसी JICA बेहद आसान शर्तों पर 88,000 करोड़ रुपए की मदद दे रही है।
- ब्याज दर: मात्र 0.1% सालाना।
- अवधि: लोन चुकाने के लिए 50 साल का समय मिलेगा और पहले 15 साल तक कोई किस्त नहीं देनी होगी।
- जापान बुलेट ट्रेन की विश्वप्रसिद्ध ‘शिनकानसेन’ तकनीक और ट्रेनिंग भी भारत को ट्रांसफर कर रहा है।
🚗 दुनिया की हर 3 में से 2 सुजुकी कार ‘मेड इन इंडिया’
पीएम मोदी ने ऑटोमोबाइल सेक्टर में दोनों देशों की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि सुजुकी दुनिया में हर साल करीब 30 लाख कारें बनाती है, जिनमें से 20 लाख (करीब 66%) कारें अकेले भारत में बनती हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में मारुति सुजुकी ने भारत से 100 से अधिक देशों में 3.32 लाख से ज्यादा कारें निर्यात की हैं। मोदी ने कहा कि अब ऐसी ही सफलता शिपबिल्डिंग, एविएशन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भी दोहराई जाएगी।
🔋 ग्रीन एनर्जी और आर्थिक सुरक्षा का नया रोडमैप
चीन पर वैश्विक निर्भरता को कम करने और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैटेरियल्स के क्षेत्र में हाथ मिलाया है। इसके साथ ही दोनों देशों ने ‘इंडिया-जापान नेक्स्ट-जनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप फ्रेमवर्क’ लॉन्च किया है, जिसके तहत बैटरी, ग्रीन हाइड्रोजन और न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में मिलकर काम किया जाएगा।
📍 राजस्थान का ‘नीमराना’ बना भारत का ‘मिनी जापान’
राजस्थान के अलवर जिले का नीमराना कस्बा आज भारत-जापान औद्योगिक सहयोग का सबसे सफल मॉडल बन चुका है। करीब 1,160 एकड़ में फैले इस जापानी इंडस्ट्रियल ज़ोन में 50 से ज्यादा बड़ी जापानी कंपनियां काम कर रही हैं, जिससे 26 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। यहां रहने वाले जापानी नागरिकों के लिए जापानी होटल, रेस्तरां और सुपरमार्केट मौजूद हैं, जिससे उन्हें बिल्कुल अपने देश जैसा माहौल मिलता है। अब जगह कम पड़ने के कारण राजस्थान सरकार पास के ‘घीलोट’ में भी नया जापानी ज़ोन विकसित कर रही है।

चीन को सीधा संदेश: ‘धमकी और दबाव बर्दाश्त नहीं’
सुरक्षा के मोर्चे पर जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने एक बेहद मजबूत और कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, “भारत और जापान एशिया की दो बड़ी लोकतांत्रिक ताकतें हैं। दोनों देश मिलकर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान बनाए रखेंगे और किसी भी देश द्वारा धमकी, दबाव या ताकत के दम पर हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में हालात बदलने की कोशिशों का मिलकर कड़ा विरोध करेंगे।”
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की ऐसी ही सटीक और विश्वसनीय खबरों के लिए पढ़ते रहिए drnewsindia.com।




