भोपाल में आज निकलेगा मोहर्रम का मुख्य मातमी जुलूस: रूट डायवर्जन लागू, पुराने शहर में भारी वाहनों पर नो-एंट्री

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भोपाल। राजधानी भोपाल में आज यौम-ए-आशूरा (10वीं मोहर्रम) पर कर्बला की शहादत की याद में शहर का मुख्य मातमी जुलूस निकाला जाएगा। हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके 72 साथियों की लासानी कुर्बानी को शिद्दत के साथ याद करते हुए इस जुलूस में सैकड़ों ताज़िये, बुर्राक, सवारियां और इस्लामी परचम (तिरंगे के साथ) शामिल होंगे।

शुक्रवार को शहादत की रात में शहर भर में ताज़िये और सवारियों ने गश्त कर प्रमुख दरगाहों व इमामबाड़ों पर सलामी की रस्म अदा की। आज दोपहर से मुख्य मार्ग अकीदतमंदों से गुलजार रहेंगे, जिसे देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक के कड़े इंतजाम किए हैं।

📍 जुलूस का मुख्य मार्ग और समय

पहला मातमी जुलूस फतेहगढ़ क्षेत्र से शुरू होकर मोती मस्जिद चौराहे सहित विभिन्न मार्गों से होते हुए वीआईपी रोड स्थित कर्बला पहुंचेगा।

  • मुख्य जमावड़ा: शहर के अलग-अलग कोनों से आने वाले ताज़िये इमामीगेट से पीरगेट के बीच एकत्रित होंगे।
  • समय और मुख्य रूट: दोपहर 12 बजे के बाद यह बड़ा जुलूस भवानी चौक, रॉयल मार्केट, हमीदिया अस्पताल और कोहेफिजा तिराहा होते हुए वीआईपी रोड कर्बला के लिए रवाना होगा। कुछ ताज़िये गिन्नौरी क्षेत्र की ओर भी रुख करेंगे।

🎤 चौराहों पर होंगी मजहबी तकरीरें

जुलूस के दौरान शहर के प्रमुख चौराहों पर उलेमाओं और बाहरी सूबों से आए मेहमान उलेमाओं की मजहबी तकरीरें (वाअज़) होंगी। इनमें हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) की पवित्र जीवनी, कर्बला की जंग और उनके सब्र व इंसाफ के संदेश पर प्रकाश डाला जाएगा।

🚫 ट्रैफिक अलर्ट: इन रास्तों पर रहेगा डायवर्जन

जुलूस के कारण पुराने शहर के कई हिस्सों में शाम के समय ट्रैफिक का भारी दबाव रहेगा। यातायात पुलिस ने आम जनता से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की है।

⚠️ शाम 6 बजे से इन इलाकों में बढ़ेगा दबाव:

  • भारत टॉकीज, अल्पना तिराहा, नादरा बस स्टैंड, भोपाल टॉकीज, शाहजहांनाबाद, रॉयल मार्केट, कोहेफिजा तिराहा और कर्बला क्षेत्र। इन क्षेत्रों में शाम 6 बजे के बाद वाहनों की आवाजाही प्रभावित रहेगी।

🚛 भारी वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध:

  • पुराने शहर के प्रमुख मार्ग (भारत टॉकीज से कर्बला तक) पर सभी प्रकार के भारी, मालवाहक और व्यावसायिक वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा।
  • इसके अलावा, 24 से 26 जून तक रोजाना शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक पूरे शहर में भारी वाहनों की नो-एंट्री लागू रहेगी।

✈️ एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग:

अगर आप आज शाम को राजाभोज एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन जा रहे हैं, तो इन रास्तों का चुनाव करें:

गंतव्य (Destination)वैकल्पिक मार्ग (Alternative Routes)
राजाभोज एयरपोर्ट (Route 1)भारत माता चौराहा ➡️ भदभदा ➡️ साक्षी ढाबा ➡️ नीलबड़ ➡️ नाथूबरखेड़ा रोड ➡️ मुगालिया छाप ➡️ खजूरी सड़क ➡️ मुबारकपुर होते हुए।
राजाभोज एयरपोर्ट (Route 2)प्रभात चौराहा ➡️ जेके रोड ➡️ रत्नागिरी ➡️ अयोध्या बायपास ➡️ भानपुर ➡️ करोंद ➡️ नई जेल ➡️ गांधीनगर मार्ग।
भोपाल रेलवे स्टेशन(नए शहर से जाने वाले यात्रियों के लिए) प्रभात चौराहा ➡️ परिहार चौराहा ➡️ 80 फीट रोड ➡️ बजरिया तिराहा।

📖 इतिहास के पन्नों से: क्यों मनाया जाता है मोहर्रम?

मक्का-मदीना के बाद सबसे पवित्र स्थल: इराक का ‘कर्बला’ शहर (बगदाद से 120 किमी दूर) शिया समुदाय के लिए बेहद पाक मुकाम है।

इस्लामिक कैलेंडर के पहले महीने को मोहर्रम कहते हैं। साल 680 ईस्वी में उमय्यद खिलाफत के शासक यजीद की फौज ने इमाम हुसैन और उनके परिवार को कर्बला के तपते रेगिस्तान में घेर लिया था और उनका पानी तक बंद कर दिया था। यजीद की गुलामी स्वीकार न करने पर 10 मोहर्रम की सुबह जंग हुई।

नमाज के दौरान तीरों की बौछार के बीच इमाम हुसैन ने अपनी नमाज पूरी की। दिन ढलते-ढलते इमाम हुसैन, उनके 6 महीने के बेटे अली असगर, 18 साल के बेटे अली अकबर और 7 साल के भतीजे कासिम सहित कुल 72 लोग शहीद हो गए। इसी जुल्म और शहादत की याद में 10वीं मोहर्रम को ‘आशूरा’ (मातम का दिन) के रूप में मनाया जाता है।

🇮🇳 भारत में कैसे हुई शुरुआत?

  • हुमायूं का काल (1540): शेरशाह सूरी से हारने के बाद मुगल शासक हुमायूं ने ईरान (पर्शिया) में शरण ली थी। ईरान के शाह तहमस्प की मदद से जब हुमायूं दोबारा दिल्ली की गद्दी पर बैठा, तो उसके साथ बड़ी संख्या में शिया सैनिक भारत आए। यहीं से भारत में मोहर्रम के जुलूस और ताज़ियेदारी की परंपरा की नींव पड़ी।
  • औरंगजेब का प्रतिबंध: बाद के मुगल काल में शासक औरंगजेब ने मोहर्रम के इन सार्वजनिक जुलूसों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

वर्तमान में भारत में शिया और सुन्नी दोनों ही समुदाय पूरी अकीदत के साथ इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं।

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