Drnewsindia.com / 18 दिसंबर 2025
भोपाल / के भेल संगम क्षेत्र में नाली ढंकने के काम में बड़े पैमाने पर सरिया घोटाले की आशंका सामने आई है। वार्ड-53 स्थित कृष्णा आर्केड और वैष्णव परिसर के पास 240 मीटर लंबी नाली को आरसीसी से कवर करने के लिए 16 हजार 139 किलोग्राम सरिया इस्तेमाल होना दर्शाया गया है। यह खुलासा तब हुआ, जब प्रभारी इंजीनियर ने मेजर बुक में इतनी भारी मात्रा में लोहे के उपयोग का उल्लेख किया।
मामला सामने आने के बाद नगर निगम के कार्यपालन यंत्री (ईई) बृजेश कौशल ने स्थल निरीक्षण के लिए पत्र जारी किया है, ताकि विस्तृत रिपोर्ट निगम कमिश्नर संस्कृति जैन को सौंपी जा सके।
खुदाई में कम निकला सरिया, गड़बड़ी की आशंका
सूत्रों के अनुसार, नाली के ऊपर आरसीसी कवर के नाम पर लोहा ज्यादा दिखाकर भुगतान लेने की आशंका जताई जा रही है। जब एक स्थान पर नाली की खुदाई कर जांच की गई, तो वहां सरिया अपेक्षा से काफी कम मात्रा में मिला, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और रिकॉर्ड पर सवाल खड़े हो गए हैं।
13.34 लाख रुपए का था पूरा काम
नगर निगम द्वारा 25 जून 2025 को इस कार्य को 13 लाख 34 हजार 238 रुपए की लागत से स्वीकृत किया गया था। कार्य के अनुसार, 240 मीटर लंबी और करीब 3 फीट चौड़ी नाली को आरसीसी से ढंकना था।
काम पूरा होने के बाद नवंबर 2025 में प्रभारी सहायक यंत्री निशांत तिवारी ने मेजरमेंट और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिसमें सरिया उपयोग की मात्रा 16,139 किलोग्राम बताई गई।
ईई ने दिए जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए 5 दिसंबर को कार्यपालन यंत्री बृजेश कौशल ने प्रभारी सहायक यंत्री निशांत तिवारी और उप यंत्री रूपांकन वर्मा को पत्र लिखकर जांच के निर्देश दिए। पत्र में कहा गया कि स्थल का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि निगम कमिश्नर से मौके का निरीक्षण कराया जा सके।
निर्माण के दौरान नहीं हुआ निरीक्षण
नगर निगम सूत्रों के अनुसार, निर्माण के दौरान न तो ईई और न ही अन्य जिम्मेदार अधिकारियों ने साइट का दौरा किया। मामला उजागर होने के बाद ही आनन-फानन में जांच प्रक्रिया शुरू की गई।
बताया जा रहा है कि 8 दिसंबर को स्थल निरीक्षण तो किया गया, लेकिन अब तक निगम कमिश्नर को जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है।
ईई ने नहीं उठाया फोन
इस पूरे मामले में जब कार्यपालन यंत्री बृजेश कौशल से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इससे मामले को लेकर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।



