नई दिल्ली। देशभर में मॉनसून की धीमी रफ्तार ने किसानों से लेकर आम लोगों तक की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए जारी ताजा पूर्वानुमान में बताया है कि इस महीने देश में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, जुलाई में देशभर में औसतन लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का 94% या उससे कम वर्षा दर्ज हो सकती है। इसकी बड़ी वजह प्रशांत महासागर में मजबूत हो रहा अल नीनो (El Niño) प्रभाव माना जा रहा है।

किन राज्यों में कम होगी बारिश?
IMD के अनुसार जुलाई में मध्य भारत, पश्चिम भारत और उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। वहीं उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर भारत, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ इलाकों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।

खेती पर बढ़ा संकट
जुलाई खरीफ फसलों की बुआई के लिए सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है। धान, सोयाबीन, मक्का, कपास और दालों जैसी फसलों की बुआई पहले ही प्रभावित हो चुकी है। बारिश में कमी जारी रहने पर किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। सरकार ने भी कम वर्षा की आशंका को देखते हुए कई जिलों के लिए वैकल्पिक कृषि योजनाएं तैयार की हैं।

महंगाई बढ़ने का खतरा
यदि जुलाई में भी बारिश सामान्य से कम रहती है तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसका असर सब्जियों, दालों, अनाज और खाद्य तेलों की कीमतों पर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर मॉनसून से खाद्य महंगाई बढ़ सकती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ेगा।

जून रहा बेहद सूखा
मौसम विभाग के अनुसार जून 2026 देश के लिए पिछले कई वर्षों के सबसे सूखे जून महीनों में शामिल रहा। पूरे देश में जून के दौरान बारिश सामान्य से करीब 40% कम दर्ज की गई, जिससे जलाशयों, सिंचाई और खरीफ सीजन पर असर पड़ा है।

अल नीनो क्यों बन रहा है चिंता की वजह?

अल नीनो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में बढ़ोतरी से जुड़ी एक मौसमी घटना है। इसका असर भारतीय मॉनसून पर पड़ता है और अक्सर इसके दौरान वर्षा सामान्य से कम होती है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई के दौरान बनने वाले कम दबाव के क्षेत्रों (Low Pressure Systems) की सक्रियता से कुछ इलाकों में अच्छी बारिश भी हो सकती है, इसलिए पूरे मॉनसून सीजन की तस्वीर अगले कुछ सप्ताह में और स्पष्ट होगी।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार फिलहाल देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की कमी बनी रह सकती है, लेकिन मॉनसून एक गतिशील प्रणाली है। यदि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में बंगाल की खाड़ी में मजबूत मौसम प्रणालियां बनती हैं तो वर्षा की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है। फिलहाल किसानों और राज्यों को जल संरक्षण तथा वैकल्पिक फसल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है।





