भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी चरम पर है। राज्यसभा की तीसरी सीट पर भाजपा द्वारा उम्मीदवार उतारे जाने के बाद कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए बाड़ाबंदी की रणनीति अपनाई है। इसी कड़ी में कांग्रेस के 62 विधायकों को विशेष विमान से कर्नाटक भेजने की तैयारी की गई, लेकिन मंगलवार को भोपाल एयरपोर्ट पर कांग्रेस को उस समय असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब उसके चार्टर्ड विमान को करीब तीन घंटे तक उड़ान भरने की अनुमति नहीं मिली।

कांग्रेस के 38 विधायक अपने परिवार के सदस्यों के साथ दोपहर में भोपाल एयरपोर्ट पहुंच गए थे। विमान में कुल 75 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। निर्धारित समय पर सभी यात्री विमान में सवार होने की तैयारी में थे, लेकिन उड़ान की मंजूरी नहीं मिलने के कारण उन्हें घंटों तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और विधायकों ने सरकार पर विमान को जानबूझकर रोकने का आरोप लगाया।
कांग्रेस का कहना था कि राज्यसभा चुनाव से पहले भाजपा विपक्षी विधायकों पर दबाव बनाने का प्रयास कर रही है और इसी वजह से विमान को उड़ान की अनुमति देने में देरी की गई। पार्टी नेताओं ने इसे राजनीतिक हस्तक्षेप करार दिया।
हालांकि एयरपोर्ट प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि विमान एक नॉन-शेड्यूल्ड फ्लाइट था और उसके संचालन के लिए आवश्यक डीजीसीए अनुमति संबंधी दस्तावेज एयरपोर्ट प्रबंधन के पास जमा नहीं कराए गए थे। नियमों के तहत आवश्यक दस्तावेज प्राप्त होने तक विमान को उड़ान की अनुमति नहीं दी जा सकती थी। जैसे ही संबंधित कागजात जमा कराए गए, विमान को क्लियरेंस प्रदान कर दी गई।
17 जून तक कर्नाटक में रहेंगे विधायक

कांग्रेस ने अपने विधायकों को कर्नाटक के एक रिसोर्ट में ठहराने की योजना बनाई है। पार्टी को आशंका है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग हो सकती है। इसी वजह से सभी विधायकों को एक साथ रखा जा रहा है। कांग्रेस के अनुसार विधायक 17 जून तक कर्नाटक में रहेंगे और 18 जून को मतदान के लिए सीधे भोपाल लौटेंगे।
सूत्रों के अनुसार पहले चरण में 38 विधायक विशेष विमान से रवाना होने वाले थे, जबकि शेष 22 विधायकों को शाम की दूसरी फ्लाइट से बेंगलुरु भेजने की तैयारी थी।

तीसरी राज्यसभा सीट पर फंसा गणित
मध्यप्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट इस बार सबसे अधिक चर्चा में है। संख्या बल के आधार पर कांग्रेस इस सीट पर अपनी दावेदारी मजबूत मान रही थी, लेकिन भाजपा ने महेश केवट को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन मैदान में थीं, जबकि भाजपा ने महेश केवट को उम्मीदवार बनाया है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक भाजपा के पास तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए आवश्यक संख्या से कुछ वोट कम हैं। ऐसे में क्रॉस वोटिंग या अन्य दलों के समर्थन की संभावनाओं को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज

विमान को उड़ान की अनुमति मिलने में हुई देरी के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। कांग्रेस जहां इसे राजनीतिक दबाव का परिणाम बता रही है, वहीं प्रशासन और एयरपोर्ट प्रबंधन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत संचालित की गई और आवश्यक अनुमति मिलने के बाद ही विमान को क्लियरेंस दिया गया।

राज्यसभा चुनाव नजदीक आने के साथ प्रदेश की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि तीसरी सीट पर मुकाबला किस दिशा में जाता है और क्या कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने में सफल रहती है या भाजपा अपने राजनीतिक समीकरण साधने में कामयाब होती है।




