drnewsindia.cm/ नई दिल्ली
अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। अमेरिकी सीनेट (संसद) में एक ऐतिहासिक ‘बाइपार्टिसन बिल’ (दोनों दलों के समर्थन वाला प्रस्ताव) पेश किया गया है। इस बिल के तहत भारत और चीन समेत 5 देशों से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का प्रस्ताव है।
शुरुआती मसौदे में इस टैरिफ को 500% तक रखने की बात थी, जिसे बाद में घटाकर 100% किया गया। अगर यह बिल पास होता है, तो अमेरिकी इतिहास में पहली बार किसी देश पर सिर्फ इसलिए टैरिफ लगाया जाएगा क्योंकि वह रूस से तेल खरीद रहा है।
🎯 निशाने पर कौन से 5 देश हैं?
अमेरिका ने उन देशों की सूची तैयार की है जो रूस के ऊर्जा संकट के समय उसके सबसे बड़े खरीदार बनकर उभरे हैं:
- भारत 🇮🇳
- चीन 🇨🇳
- हंगरी 🇭🇺
- स्लोवाकिया 🇸🇰
- अजरबैजान 🇦🇿

💡 यूरोप को बड़ी राहत: इस बिल में 15 यूरोपीय देशों को छूट दी गई है, क्योंकि वे रूस से 15% से कम गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे अपनी निर्भरता पूरी तरह खत्म कर रहे हैं।
📌 अमेरिका आखिर रूस पर इतना सख्त क्यों है?
अमेरिका इस बिल के जरिए रूस के आर्थिक साम्राज्य को पूरी तरह तोड़ना चाहता है। इसके पीछे 4 बड़े कारण हैं:
- यूक्रेन युद्ध की फंडिंग रोकना: अमेरिका का मानना है कि रूस अपनी सेना और युद्ध का खर्च तेल और गैस बेचकर मिल रही कमाई से निकाल रहा है।
- रूस के सबसे बड़े हथियार पर चोट: रूस के सरकारी बजट और विदेशी मुद्रा भंडार का एक बड़ा हिस्सा ऊर्जा निर्यात से आता है। इस बिल के जरिए सीधे बैंकों और ऊर्जा प्रोजेक्ट्स को ब्लॉक किया जाएगा।
- खरीदारों पर दबाव बनाना: भारत और चीन जैसे बड़े देशों पर दबाव डालकर रूस के तेल बाजार को सिकोड़ना ताकि मॉस्को की कमाई ठप हो जाए।
- पुतिन को बातचीत के लिए मजबूर करना: आर्थिक रूप से घेरकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन के साथ शांति वार्ता की मेज पर लाना।

🤝 दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम को श्रद्धांजलि है यह बिल
यह बिल अमेरिकी राजनीति में एक भावुक मोड़ भी ले चुका है:
- इस बिल को रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट रिचर्ड ब्लूमेंथल ने तैयार किया था।
- 11 जुलाई को सीनेटर लिंडसे ग्राहम का निधन हो गया। अपने निधन से ठीक एक दिन पहले उन्होंने यूक्रेन में कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस बिल को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह सहमत हैं।
- व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, “यह लिंडसे के सम्मान में है। यह उनका सबसे बड़ा मुद्दा था और इसके कानून बनने की पूरी संभावना है।”
⏳ आगे क्या होगा? कैसे बनेगा यह कानून?
इस बिल को कानून की शक्ल लेने के लिए अभी एक तय प्रक्रिया से गुजरना होगा:
| चरण | स्थिति |
| सीनेट में पेश | पूरी हो चुकी है (26 सीनेटर्स का समर्थन हासिल) |
| प्रतिनिधि सभा (House) से मंजूरी | अभी बाकी है |
| राष्ट्रपति के हस्ताक्षर | अंतिम चरण, जिसके बाद यह कानून बनेगा |
चूंकि इस बिल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों का मजबूत समर्थन हासिल है, इसलिए अमेरिकी राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बिल बहुत जल्द कांग्रेस से पारित हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों के लिए यह एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

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