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विदिशा (आज की ताजा खबर): विदिशा जिले की ग्यारसपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले कस्बा बागरोद स्थित प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर की कमान और मालिकाना हक को लेकर चल रहा पुराना विवाद एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है। मंदिर के पारंपरिक पुजारी परिवार ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। परिवार का आरोप है कि दूसरे पक्ष द्वारा फर्जी दस्तावेजों के सहारे खुद को पुजारी घोषित कराकर मंदिर की बेशकीमती संपत्ति पर कब्जा करने की साजिश रची जा रही है।
पीढ़ियों पुराना है नाता, बुजुर्ग और महिला को प्रताड़ित करने का आरोप
कलेक्ट्रेट पहुंचे प्रवीण अवस्थी, सपना अवस्थी और उनके परिजनों ने बताया कि यह ऐतिहासिक मंदिर कानूनगो परिवार द्वारा बनवाया गया था और मंदिर से जुड़ी भूमि भी इसी परिवार द्वारा दान में दी गई थी। परिवार के अनुसार, 90 वर्षीय बुजुर्ग पुजारी सुदामा प्रसाद वर्षों से यहां पूरी निष्ठा के साथ पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। वर्तमान में उनकी नातिन सपना अवस्थी मंदिर की व्यवस्थाओं और देखरेख में हाथ बंटा रही हैं।
पुजारी परिवार का आरोप है कि सपना अवस्थी को सिर्फ एक ‘महिला’ होने के कारण पूजा-अर्चना करने से रोकने और उनके अधिकारों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं 90 वर्षीय सुदामा प्रसाद ने रूआंसे होकर आरोप लगाया कि इस उम्र में भी उन्हें मंदिर परिसर के भीतर डराया-धमकाया जा रहा है।
फर्जी दस्तावेजों से कब्जे की कोशिश, पहले भी हो चुकी है मारपीट
शिकायतकर्ताओं ने सीधे तौर पर लक्ष्मी नारायण दुबे नामक व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि लक्ष्मी नारायण ने वर्ष 2024 में कथित रूप से हेरफेर और गलत दस्तावेजों के आधार पर खुद को मंदिर का शासकीय पुजारी घोषित करवा लिया था और मंदिर पर अवैध कब्जे का प्रयास किया था। इस विवाद को लेकर पूर्व में भी दोनों पक्षों के बीच भारी तनाव और मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे क्षेत्र का माहौल बिगड़ा था।

कलेक्टर ने निरस्त किया था दावा, फिर भी दी जा रही धमकियां
प्रवीण अवस्थी ने दावा किया कि पूर्व में कलेक्टर स्तर पर हुई एक उच्च स्तरीय जांच के बाद लक्ष्मी नारायण का दावा पूरी तरह निरस्त कर दिया गया था और उन्हें पुजारी पद से हटा दिया गया था। इसके बावजूद, आरोपी पक्ष द्वारा अब भी मंदिर में जबरन प्रवेश कर दबाव बनाने, जान से मारने की धमकी देने और प्रशासन से झूठी शिकायतें कर प्रताड़ित करने का सिलसिला जारी है।

शासकीय नहीं, निजी है मंदिर: अवस्थी परिवार
पुजारी परिवार ने स्पष्ट किया कि कुछ असामाजिक तत्व इस मंदिर को ‘शासकीय संपत्ति’ बताकर समाज में भ्रम फैला रहे हैं, जबकि यह पूरी तरह से एक निजी मंदिर है। पीड़ित परिवार ने कलेक्ट्रेट में अपनी लिखित शिकायत सौंपकर मामले में निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराने, दोषी पक्ष पर कड़ी कार्रवाई करने और मंदिर परिसर सहित परिवार को उचित सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।





