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विदिशा | श्रावण मास के शुभारंभ के साथ गुरुवार को विदिशा की पवित्र बेतवा नदी के बड़ वाले घाट पर पार्थिव शिवलिंग निर्माण की अनूठी परंपरा फिर शुरू हो गई। ध्वजारोहण और भूमि पूजन के बाद बाढ़ वाले भोलेनाथ सेवा समिति के सदस्यों ने विधि-विधान से शिवलिंग निर्माण का शुभारंभ किया। पूरे श्रावण मास तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन करेंगे।
श्रमदान से शुरू हुई थी आस्था की यह मिसाल
इस परंपरा की सबसे खास बात यह है कि इसकी शुरुआत किसी बड़े धार्मिक आयोजन से नहीं, बल्कि श्रमदान से हुई थी। बरसात के दिनों में बेतवा नदी की बाढ़ के साथ आने वाली मिट्टी घाट पर जमा हो जाती थी, जिसे स्थानीय लोग वर्षों से मिलकर साफ करते थे।
साल 2016 में श्रावण मास के दौरान घाट की सफाई करते समय श्रद्धालुओं के मन में उसी मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बनाने का विचार आया। विधि-विधान से बनाए गए उस पहले शिवलिंग ने धीरे-धीरे एक नई धार्मिक परंपरा का रूप ले लिया, जो आज विदिशा की पहचान बन चुकी है।

रोज बढ़ेगा शिवलिंग का आकार
समिति के प्रमुख बद्री साहू ने बताया कि इस वर्ष जिले में सामान्य से कम बारिश होने के कारण बेतवा नदी में पर्याप्त मिट्टी नहीं आई है। इसलिए शुरुआत में पास के बगीचे से मिट्टी लाकर शिवलिंग का निर्माण किया गया है। जैसे-जैसे नदी में बाढ़ के साथ नई मिट्टी आएगी, उसी मिट्टी से प्रतिदिन शिवलिंग का विस्तार किया जाएगा।
पूरे महीने रहेगा आस्था का केंद्र
श्रावण मास के दौरान बड़ वाला घाट श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। यहां दूर-दूर से आने वाले भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन करते हैं। समिति के सदस्य और स्थानीय श्रद्धालु प्रतिदिन श्रमदान कर शिवलिंग के निर्माण और विस्तार में भागीदारी निभाते हैं।

विदिशा की धार्मिक पहचान बन चुकी है परंपरा
बाढ़ वाले भोलेनाथ सेवा समिति का कहना है कि श्रमदान और सेवा भावना से शुरू हुई यह पहल अब विदिशा की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। हर वर्ष श्रावण मास में हजारों श्रद्धालु इस अनूठी परंपरा का हिस्सा बनते हैं, जिससे आस्था के साथ सामाजिक सहभागिता का संदेश भी मिलता है।




