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भोपाल | मध्य प्रदेश में किसानों की उपज की खरीदी न होने, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी न मिलने और लगातार बढ़ती लागत को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भोपाल के बीटीआर भवन में आयोजित एक अहम बैठक में किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकारें किसानों से ‘दुश्मनी’ जैसा व्यवहार कर रही हैं।
सर्वर डाउन और भुगतान में देरी पर आक्रोश
बैठक की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ किसान नेता प्रहलाद वैरागी ने कहा कि यह आश्चर्य का विषय है कि जब भी किसानों के पंजीकरण का समय आता है, सरकारी पोर्टल का सर्वर डाउन हो जाता है। मोर्चा ने ई-उपार्जन के तहत बेचे गए गेहूं का भुगतान तत्काल न होने और मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीदी का आश्वासन न मिलने पर कड़ा ऐतराज जताया।
बैठक के मुख्य मुद्दे:
- जबरन भूमि अधिग्रहण: किसानों को विश्वास में लिए बिना और उचित मुआवजे के बिना हो रहे भूमि अधिग्रहण का विरोध।
- बिजली और खाद संकट: स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध और खाद-डीजल की संभावित किल्लत पर चिंता।
- कर्ज माफी: अधूरी कर्ज माफी और खाद आपूर्ति के पुख्ता इंतजाम न होने पर नाराजगी।

आंदोलन की चरणबद्ध रूपरेखा
संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रदेशव्यापी अभियान चलाकर भोपाल में एक बड़े अनिश्चितकालीन आंदोलन की तैयारी की है:
- मई माह: प्रदेश के सभी संभागों में किसान सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
- 7 जून: राजधानी भोपाल में राज्य स्तरीय कन्वेंशन होगा, जिसमें आंदोलन के अगले चरणों की घोषणा की जाएगी।
- संगठनात्मक विस्तार: जिलों और स्थानीय स्तर पर सक्रिय सभी किसान संगठनों को इस साझा मंच से जोड़ने की मुहिम चलाई जाएगी।

इन किसान नेताओं की रही मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण बैठक में अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव बादल सरोज ने चर्चा की शुरुआत की। बैठक में किसान जाग्रति संगठन के इरफ़ान जाफरी, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के अनिल यादव व सुरेश पाटीदार, मप्र किसान सभा के जनक राठौर और उपेन्द्र यादव, एआईकेकेएमएस के महेंद्र नायक सहित कई नेता उपस्थित थे। किसान संघर्ष समिति की ओर से डॉ. सुनीलम ने भी ऑनलाइन जुड़कर अपनी बात रखी।
करीब दो दर्जन से अधिक किसान संगठनों ने एकजुटता दिखाते हुए इस संघर्ष में शामिल होने का संकल्प लिया है।





