drnewsindia.com / सीहोर | डिजिटल डेस्क: सीहोर कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई उस समय विरोध प्रदर्शन का केंद्र बन गई, जब सैकड़ों किसान हाथों में खराब हो चुकी सोयाबीन की फसल के पौधे लेकर पहुंच गए। कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठकर किसानों ने जमकर नारेबाजी की और अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
🌾 खराब फसल का तत्काल सर्वे और मुआवजे की मांग
किसानों ने प्रशासन के समक्ष अपनी मुख्य मांगें रखते हुए कहा कि बारिश और बीमारियों से सोयाबीन की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है:
- सर्वे और बीमा राशि: खराब हुई सोयाबीन की फसल का निष्पक्ष व त्वरित सर्वे कराया जाए और किसानों को पूरा मुआवजा व फसल बीमा राशि दिलाई जाए।
- बकाया मुआवजा: किसानों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि उन्हें पिछले साल का भी मुआवजा अब तक नहीं मिला है, जिससे वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

🛰️ ‘सेटेलाइट सीमांकन से बदले नक्शे, आपस में लड़ रहे किसान’
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने राजस्व विभाग की नई व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए:
- नक्शे बदलने का आरोप: किसानों का कहना है कि सेटेलाइट के जरिए किए जा रहे भूमि सीमांकन के कारण जमीन के नक्शे बदल गए हैं, जिससे किसानों के बीच आपसी विवाद और रंजिश की स्थिति बन रही है।
- पटवारियों का व्यवहार: किसानों ने पटवारियों के रवैये और कार्यप्रणाली को लेकर भी अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की।
⚡ बिजली कंपनी की मनमानी और 🥛 दूध के कम दामों पर घेरा
किसान नेताओं ने विद्युत वितरण कंपनी और दूध कंपनियों की मनमानी पर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया:
- स्मार्ट मीटर से भारी बिल: स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद से किसानों को भारी-भरकम बिजली बिल थमाए जा रहे हैं। साथ ही किसानों पर बिजली चोरी के झूठे केस दर्ज करने का आरोप लगाया।
- दूध के दाम बढ़ाने की मांग: पशुपालक किसानों से निजी व सहकारी दूध कंपनियां बेहद कम दामों पर दूध खरीद रही हैं, जिससे पशुपालन लागत भी नहीं निकल पा रही है। दूध के सरकारी दाम बढ़ाने की मांग की गई।

👥 प्रदर्शन में प्रमुख रूप से शामिल किसान नेता
इस विशाल विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान बलवंत सिंह पटेल, चंद्रभान सिंह प्रियांशु, धनराज, महेंद्र सिंह, दयाल सिंह, प्रताप सिंह समेत विभिन्न गांवों के सैकड़ों किसान प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।




