सीहोर के मुंगावली में जल संकट: 6 साल से अधूरी 1.40 करोड़ की योजना, खेतों के ट्यूबवेल और बल्लियों के सहारे बुझ रही 3 हजार कंठों की प्यास

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मध्य प्रदेश के सीहोर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मुंगावली में भीषण गर्मी के बीच पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है। गांव का भूजल स्तर (Groundwater Level) पाताल में चला गया है

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सीहोर : मध्य प्रदेश के सीहोर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मुंगावली में भीषण गर्मी के बीच पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है। गांव का भूजल स्तर (Groundwater Level) पाताल में चला गया है, जिससे लगभग सभी पारंपरिक जल स्रोत दम तोड़ चुके हैं। सबसे शर्मनाक बात यह है कि ग्रामीणों को इस संकट से बचाने के लिए आई करोड़ों की योजना पिछले 6 साल से सरकारी कछुआ चाल और लापरवाही की भेंट चढ़ी हुई है।

📉 आंकड़े जो बयां कर रहे हैं मुंगावली का दर्द

  • कुल आबादी: 3,000+ निवासी
  • कुल मकान: 889 परिवार
  • सरकारी हैंडपंप: 13 (जो जनवरी महीने में ही पूरी तरह सूख चुके हैं)
  • नल-जल योजना का बजट: ₹1.40 करोड़ (6 साल से अधर में)

🪵 बल्लियों के सहारे आ रहा पानी, गरीबों पर दोहरी मार

गांव में पानी का अकाल ऐसा है कि ग्रामीण अपना कामकाज छोड़कर दिन-भर सिर्फ पानी का इंतजाम करने में जुटे रहते हैं।

  • खेतों पर निर्भरता: जिन ग्रामीणों के पास खुद के खेत और निजी बोरिंग हैं, वे दूर-दराज से पानी ला रहे हैं।
  • देसी जुगाड़: कई ग्रामीणों ने खेतों से लेकर गांव तक बल्लियों (लकड़ी के खंभों) के सहारे अस्थाई पाइपलाइन बिछाई है, ताकि घर तक पानी पहुँच सके।
  • मजबूर गरीब परिवार: इस स्थिति में सबसे ज़्यादा आफत उन गरीब परिवारों पर आई है जिनके पास न तो खुद की जमीन है और न ही कोई निजी ट्यूबवेल। वे पूरी तरह दूसरों की दया पर निर्भर हैं।

💰 भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ी ‘नल-जल योजना’

ग्रामीणों का आरोप है कि अफसरों और ठेकेदारों की सांठगांठ के चलते करोड़ों रुपये की राशि का बंदरबांट हुआ है, जिसके कारण पानी की टंकी का निर्माण भी बेहद घटिया स्तर का किया गया।

2 ठेकेदार हो चुके हैं ब्लैकलिस्ट: पिछले 6 वर्षों में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के दो ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर भाग गए। घटिया निर्माण और तय समय पर काम न करने के कारण अंबकेश्वर स्टील और राधिका अग्रवाल नामक कंपनियों को ब्लैकलिस्ट (काली सूची में डालना) किया जा चुका है।

वर्तमान स्थिति: कई सालों तक काम बंद रहने के बाद अब यह काम टी एंड के कंस्ट्रक्शन (देवास) को सौंपा गया है, लेकिन धरातल पर काम अब भी अधूरा है और जनता प्यासी है।

🗣️ ज़िम्मेदारों का क्या है कहना?

PHE विभाग के ईई (Executive Engineer) प्रदीप कुमार सक्सेना ने इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा:

“समय पर काम पूरा नहीं करने की वजह से पूर्व के दो ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया गया था, जिसके चलते योजना में इतनी देरी हुई। अब नए ठेकेदार को काम सौंप दिया गया है और वह तेजी से काम कर रहा है। जल्द ही इस योजना को पूरा कर ग्रामीणों तक पानी पहुँचाया जाएगा।”

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