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सीहोर : मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। ताजा मामला ग्राम पंचायत रामगढ़ का है, जहां के पांच में से चार गांवों—माजरी टोल, पांगरी जंगल, कलापठा और महू बड़ला—में स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है। इन गांवों में लगे तमाम हैंडपंप और नलकूप (बोरवेल) पूरी तरह सूख चुके हैं, जिसके कारण ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
🔴 मुख्य बिंदु: संकट की बड़ी बातें
- प्रभावित गांव: माजरी टोल, पांगरी जंगल, कलापठा और महू बड़ला।
- समस्या: हैंडपंप और नलकूप पूरी तरह सूखे, पीने के पानी का अभाव।
- आरोप: पीएचई (PHE) विभाग के SDO ने वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी भ्रामक रिपोर्ट।
- चेतावनी: जल्द समाधान न होने पर पीएचई विभाग के खिलाफ उग्र आंदोलन की तैयारी।
मुख्यमंत्री और मंत्रियों के नाम सौंपा ज्ञापन
जल संकट से जूझ रहे दर्जनों ग्रामीण दो दिन पहले अपनी शिकायत लेकर राजधानी भोपाल पहुंचे थे। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रियों के नाम विभागीय आला अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर प्रभावित गांवों में तत्काल नए नलकूप खनन (बोरवेल) कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि वे पहले भी कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्थायी कदम नहीं उठाया गया है।

SDO पर लगा ‘झूठी रिपोर्ट’ भेजने का गंभीर आरोप
ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों में सबसे ज्यादा नाराजगी पीएचई विभाग के एसडीओ (SDO) को लेकर है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि अधिकारियों ने जमीनी हकीकत को छिपाकर वरिष्ठ कार्यालय को गलत रिपोर्ट भेजी है।
क्या है पूरा मामला? पंचायत के कुल 5 गांवों में से सिर्फ 1 गांव में फिलहाल पानी उपलब्ध है। आरोप है कि SDO ने इसी एक गांव को आधार बनाकर पूरी पंचायत में पानी की उपलब्धता दर्शा दी। इस झूठी रिपोर्ट के कारण प्रभावित 4 गांवों में नए नलकूप खनन की प्रक्रिया सरकारी फाइलों में अटक गई है।
खाली बर्तन लेकर महिलाओं का फूटा गुस्सा, किया प्रदर्शन
इसी बीच, जब सूखे बोरवेलों की सफाई के लिए एक मशीन गांव पहुंची, तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और पुरुष अपने घरों से खाली बर्तन (बाल्टियां और घड़े) लेकर मौके पर जमा हो गए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी व प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
- ग्राम पंचायत रामगढ़ के चारों प्रभावित गांवों में तुरंत नए नलकूप खोदे जाएं।
- जमीनी हकीकत छिपाकर गलत और भ्रामक रिपोर्ट देने वाले दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों की चेतावनी: यदि प्रशासन ने जल्द ही पेयजल की सुचारू व्यवस्था नहीं की, तो प्रभावित ग्रामीण पीएचई विभाग और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ एक बड़ा और उग्र आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।
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