सीहोर: बारिश न होने से सूख रही थीं फसलें; रलावती और चंदेरी के किसानों ने किया अनूठा भजन-कीर्तन, प्रार्थना करते ही झूमकर बरसे बदरा

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Rural Sehore Desk (18 July 2026): सीहोर क्षेत्र में मानसून की बेरुखी और लंबे समय से बारिश न होने के कारण खेतों में खड़ी फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई थीं। जलस्तर गिरने से कुएं, तालाब और अन्य पारंपरिक जलस्रोत भी सूखने लगे थे, जिससे अन्नदाता बेहद चिंतित था। इस गंभीर संकट से निजात पाने के लिए ग्राम रलावती और चंदेरी सहित आसपास के ग्रामीणों ने एक अनोखी पहल करते हुए सामूहिक पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन किया।

किसान एवं समाजसेवी एम.एस. मेवाड़ा के नेतृत्व में आयोजित इस भक्तिमय अनुष्ठान का असर ऐसा हुआ कि प्रार्थना खत्म होने से पहले ही आसमान में काले बादल घिर आए और झमाझम बूंदाबांदी शुरू हो गई।

📌 इस ग्रामीण आयोजन की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • 🙏 अनोखी प्रार्थना: किसान एम.एस. मेवाड़ा के नेतृत्व में ग्राम रलावती और चंदेरी के किसानों ने अच्छी वर्षा के लिए खेतों में ही डेरा डाला।
  • 🥁 खेतों में गूंजे भजन: ढोलक, हारमोनियम और अगरबत्ती जलाकर किसानों ने आदिदेव महादेव, हनुमान जी और इंद्रदेव भगवान का स्मरण किया।
  • 🌧️ दिखा आस्था का चमत्कार: शाम को भजन-कीर्तन के दौरान ही अचानक मौसम ने करवट ली, बादल छाए और सूखी धरती पर अमृत की बूंदें बरस पड़ीं।
  • 🌾 खिला उठा अन्नदाता: बूंदाबांदी शुरू होते ही किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे और पूरा इलाका जयकारों से गूंज उठा।

🪕 खेतों में ढोलक-हारमोनियम लेकर जुटे किसान, इंद्रदेव को मनाया

लगातार खिंच रही तपन और सूखे के हालात ने किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए भगवान की शरण में जाने पर मजबूर कर दिया:

श्रद्धा का सैलाब: समाजसेवी एम.एस. मेवाड़ा की अगुवाई में दर्जनों गांवों के किसान अपने-अपने खेतों में एकत्रित हुए। उन्होंने फसलों के बीच बैठकर पूरी श्रद्धा के साथ हाथ जोड़कर इंद्रदेव से प्रार्थना की, ताकि खेतों की खोई हुई हरियाली वापस लौट सके और जलस्रोत फिर से लबालब भर जाएं। सुबह से शुरू हुआ भजनों का यह दौर देर शाम तक अनवरत जारी रहा।

जयकारों के साथ हुआ प्रकृति का स्वागत, किसानों को मिली संजीवनी

किसानों के मुताबिक, यह उनकी सामूहिक आस्था की ही शक्ति थी कि जैसे ही भजन अपने चरम पर पहुंचे, तपते आसमान में ठंडी हवाएं चलने लगीं।

  • बरसा पानी: कुछ ही देर में घने बादलों ने सूर्य देव को ढक लिया और सूखी फसलों पर बारिश की बूंदें गिरने लगीं।
  • गूंजे जयकारे: इस सुखद नजारे को देख किसानों की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। सभी ग्रामीणों ने एक सुर में इंद्रदेव भगवान, भगवान भोलेनाथ और पवनपुत्र हनुमान जी के गगनभेदी जयकारे लगाए और प्रकृति का आभार व्यक्त किया। इस शुरुआती बारिश को फसलों के लिए जीवनदान माना जा रहा है।

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