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सीहोर/शाहगंज: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के वन परिक्षेत्र से गरीब और आदिवासी मजदूरों के कथित शोषण का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि शाहगंज-बुधनी क्षेत्र के तेंदूपत्ता खरीद केंद्रों पर फड़ ठेकेदार और समिति कर्मचारियों की मिलीभगत से मजदूरों की मेहनत की कमाई पर डाका डाला जा रहा है।
तेंदूपत्ता सीजन के दौरान नियमों को ताक पर रखकर आदिवासियों से 100 गड्डी तेंदूपत्ता के बदले 105 गड्डियां वसूली जा रही हैं, जबकि उन्हें भुगतान केवल 100 गड्डियों का ही किया जा रहा है। खेल यहीं खत्म नहीं होता, इस अतिरिक्त 5 गड्डियों को खुलेआम ‘नजराना’ बताया जा रहा है।

‘कटौती और गुणवत्ता’ के नाम पर वसूली, प्रतिबंधित जंगलों में भी घुसपैठ!
इस कथित घोटाले के पीछे दो सबसे बड़े और चौंकाने वाले आरोप सामने आए हैं:
- ‘नजराने’ के खेल से लाखों की कमाई: मजदूरों का आरोप है कि खरीद केंद्रों पर गिनती के दौरान उनसे जबरन 5 अतिरिक्त गड्डियां ली जाती हैं। जब मजदूर इसका विरोध करते हैं, तो उन्हें ‘कटौती’ या ‘गुणवत्ता’ (Quality) का हवाला देकर चुप करा दिया जाता है। सूत्रों के अनुसार, इस ‘अतिरिक्त खेल’ से पूरे सीजन में लाखों रुपए का अवैध ‘नजराना’ एकत्र किया जाता है, जिसमें ठेकेदार, समिति प्रबंधन, फड़ संचालक और वन अमले के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की हिस्सेदारी होने की बात कही जा रही है।
- प्रतिबंधित वनक्षेत्रों में अवैध तुड़ाई: दूसरा बड़ा आरोप यह है कि खटपुरा, अकोला, डुंगरिया, सनखेड़ी, मुरारी, चिखली और खिड़िया जैसे उन प्रतिबंधित वन क्षेत्रों से भी बड़े पैमाने पर तेंदूपत्ता संग्रह कराया जा रहा है, जहां वन संरक्षण नियमों के तहत आम आदमी का प्रवेश तक सीमित है।

शिकायत के बाद एक्शन में प्रशासन: SDO ने दिए जांच के आदेश
मामला गरमाने के बाद वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पर संज्ञान लिया है। इस पूरे घटनाक्रम पर एसडीओ (SDO) ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा:
“यदि मजदूरों से 100 के बजाय 105 गड्डियां ली जा रही हैं, तो यह पूरी तरह से गलत और अवैध है। इस मामले की बारीकी से जांच की जाएगी और जो भी फड़ ठेकेदार या कर्मचारी दोषी पाया गया, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।”

एसडीओ ने यह भी स्पष्ट किया कि:
- प्रतिबंधित वन क्षेत्रों में तेंदूपत्ता तुड़ाई पर तुरंत रोक लगाई जाएगी।
- गरीब मजदूरों को भुगतान पूरी तरह से शासन के निर्धारित मापदंडों के अनुसार ही सुनिश्चित किया जाएगा।




