सीहोर: रामलीला में ‘राम वनवास’ के मार्मिक मंचन से नम हुईं दर्शकों की आँखें; राजा दशरथ का पुत्र वियोग देख भावुक हुआ जनसैलाब

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रामलीला में 'राम वनवास' के मार्मिक मंचन से नम हुईं दर्शकों की आँखें; राजा दशरथ का पुत्र वियोग देख भावुक हुआ जनसैलाब

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Sehore Cultural News: शहर के प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर में इन दिनों आस्था और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। यहाँ प्रयागराज से पधारे श्री रामायण रामलीला मंडल के तत्वाधान में भव्य रामलीला का आयोजन किया जा रहा है।

मंचन के दौरान जब भगवान श्री राम के वनवास का प्रसंग सामने आया, तो कलाकारों के जीवंत अभिनय को देखकर वहाँ मौजूद हर श्रद्धालु भावुक हो उठा और दर्शकों की आँखें नम हो गईं।

📌 मंचन की मुख्य झलकियां (Key Highlights)

  • आयोजन स्थल: प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर, सीहोर।
  • विशेष प्रसंग: माता कैकेयी का कोपभवन संवाद, श्रीराम का वनगमन और राजा दशरथ का प्राण त्याग।
  • मुख्य अतिथि एवं संत संग: रामलीला की शुरुआत महंत बृजेश शर्मा, संत माधवदास महाराज, संस्कार मंच के संयोजक जितेन्द्र तिवारी, सनातन सेना प्रदेश सचिव पवन केवट और आयुष गुप्ता ने विधि-विधान से आरती कर की।

🎭 मंथरा के बहकावे से लेकर दशरथ के प्राण त्याग तक की पूरी कथा

संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित ‘मामा’ ने प्रसंग की जानकारी देते हुए बताया कि सीता स्वयंवर के बाद जब श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता अयोध्या लौटते हैं, तो पूरे राज्य में उत्सव सा माहौल हो जाता है। राजा दशरथ श्रीराम को अयोध्या का राजकाज सौंपने (राज्याभिषेक) का निर्णय लेते हैं।

लेकिन तभी दासी मंथरा के भड़काने पर रानी कैकेयी राजा दशरथ से अपने दो पुराने वरदान मांग लेती हैं:

  1. पहला वरदान: भरत को अयोध्या की राजगद्दी।
  2. दूसरा वरदान: श्रीराम को 14 वर्ष का कठोर वनवास।

सहर्ष तैयार हुए मर्यादा पुरुषोत्तम राजा दशरथ ने कैकेयी को बहुत समझाया, लेकिन वे टस से मस नहीं हुईं। जब श्रीराम को इस बात का पता चला, तो उन्होंने पिता के वचनों को निभाने के लिए सहर्ष वनवास स्वीकार कर लिया। इसके बाद श्रीराम, लक्ष्मण और सीता सन्यासी वेशभूषा में राजा दशरथ और तीनों रानियों से आज्ञा लेकर वन की ओर प्रस्थान कर गए। अंत में, श्रीराम के वियोग में राजा दशरथ तड़प-तड़प कर अपने प्राण त्याग देते हैं।

🌟 कलाकारों ने फूंक दी प्रसंग में जान

रामलीला मंडल के कलाकारों ने संवादों को इतनी खूबसूरती और दर्द के साथ पेश किया कि पूरा परिसर ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंज उठा। माता कौशल्या से विदाई और राजा दशरथ के पुत्र वियोग के दृश्यों ने दर्शकों के दिलों को छू लिया। स्थानीय नागरिकों ने इस सफल और भव्य मंचन के लिए आयोजन समिति की जमकर सराहना की।

स्रोत: श्री रामायण रामलीला मंडल एवं संस्कार मंच, सीहोर (म.प्र.) द्वारा जारी सांस्कृतिक कार्यक्रम रिपोर्ट।

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