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बिजनेस डेस्क | डिजिटल डेस्क: तीन दिनों की लगातार गिरावट के बाद आज, 3 सितंबर 2026 को भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में फिर से तगड़ी रिकवरी दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 10 ग्राम सोने के दाम में रिकॉर्ड ₹2,549 की बढ़त हुई है, जबकि चांदी भी प्रति किलो ₹4,420 तक महंगी हो गई है।
📈 आज के ताजा भाव और 1 महीने का ट्रेंड
बीते एक महीने में सोने की कीमत में ₹11,000 और चांदी में ₹16,000 प्रति किलो का उछाल आ चुका है:
| धातु | आज की बढ़त (₹) | वर्तमान भाव (3 सितंबर 2026) |
| सोना (24 कैरेट – 10 ग्राम) | +₹2,549 | ₹1.54 लाख |
| चांदी (1 किलो) | +₹4,420 | ₹2.33 लाख |

🗓️ साल 2026 में अब तक कितना बदला रेट?
साल 2026 की शुरुआत से ही सोने-चांदी के दामों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है:
- सोने में ₹21,000 की बढ़त: 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना ₹1.33 लाख पर था, जो अब बढ़कर ₹1.54 लाख के स्तर पर पहुंच गया है।
- चांदी का सफर: 31 दिसंबर 2025 को चांदी ₹2.30 लाख/किलो थी, जो अब ₹2.33 लाख पर है।
- ऑलटाइम हाई: इसी साल 29 जनवरी 2026 को सोने ने ₹1.76 लाख और चांदी ने ₹3.86 लाख का अब तक का रिकॉर्ड उच्चतम स्तर (All-time High) छुआ था।
🏙️ अलग-अलग शहरों में क्यों बदलते हैं सोने के दाम? (4 मुख्य कारण)
- ट्रांसपोर्टेशन व सिक्योरिटी: एक राज्य या शहर से दूसरे शहर सोना सुरक्षित ले जाने में ईंधन और सुरक्षा खर्च जुड़ता है, जिससे दूरी बढ़ने पर रेट बढ़ जाते हैं।
- लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: हर शहर और राज्य की स्थानीय ज्वेलरी एसोसिएशन मांग और सप्लाई के आधार पर दैनिक रेट तय करती है।
- खरीदारी की मात्रा: दक्षिण भारत में सोने की खपत सबसे ज्यादा (लगभग 40%) होने के कारण ज्वेलर्स थोक में खरीद करते हैं।
- पुराना स्टॉक व खरीद दर: ज्वेलर्स का खुद का खरीदी रेट भी तय करता है कि वे ग्राहकों को किस भाव में बेचेंगे।

💡 सोना खरीदते समय सावधान! रखें इन 3 बातों का ध्यान
- 1. BIS हॉलमार्क जरूर देखें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। 6 डिजिट का अल्फान्यूमेरिक कोड (जैसे-
AZ4524) चेक करें। - 2. रेट क्रॉस-चेक करें: खरीदारी के दिन 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट का सही भाव IBJA जैसी आधिकारिक वेबसाइट से जरूर मिला लें।
- 3. मेकिंग चार्ज पर मोलभाव करें: मेकिंग चार्ज ज्वेलर्स द्वारा लिया जाने वाला लेबर चार्ज है, जो फिक्स नहीं होता। बड़ी खरीदारी पर ज्वेलर्स से सीधे लेबर कॉस्ट का ब्रेकअप मांगें और डिस्काउंट के लिए मोलभाव करें।




