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Entertainment Desk (18 July 2026): भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी ‘स्टारडम’ शब्द का जिक्र होगा, एक नाम सबसे ऊपर चमकेगा— राजेश खन्ना। ‘ऊपर आका, नीचे काका’ के नारे से देश के करोड़ों दिलों पर राज करने वाले सुपरस्टार की यादें आज भी उतनी ही ताजा हैं।
दोपहर के वक्त जब खबर आई कि ‘काका बाबू’ अब हमारे बीच नहीं रहे, तो मानो पूरा देश स्तब्ध रह गया। सोशल मीडिया से लेकर न्यूज चैनलों तक हर तरफ सिर्फ एक ही नाम था। उनके कार्टर रोड स्थित मशहूर ‘आशीर्वाद’ बंगले के बाहर फैंस का वो जनसैलाब उमड़ा, जिसे तेज बारिश भी नहीं रोक सकी।
📌 राजेश खन्ना के जीवन और आखिरी सफर की बड़ी बातें (Key Highlights)
- 🎬 आखिरी शब्द: सोफे पर बैठे अमिताभ बच्चन के सामने करीबियों ने नम आंखों से बताया कि काका के आखिरी शब्द थे— ‘टाइम हो गया है, पैक अप।’
- 🥀 ऐतिहासिक अंतिम यात्रा: 19 जुलाई 2012 को भारी बारिश के बीच करीब 9 लाख फैंस की मौजूदगी में अंतिम यात्रा निकली। मुंबई ने ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा था।
- 🪵 अंतिम संस्कार: पवनहंस श्मशान भूमि में नातिन आरव ने पिता अक्षय कुमार की मदद से मुखाग्नि दी।
- 🧳 तोहफों के 65 सूटकेस: निधन के बाद उनके आशीर्वाद बंगले से 65 ऐसे बंद सूटकेस मिले, जो सिर्फ करीबियों के लिए खरीदे गए तोहफों से भरे थे।
- 🎤 आनंद जैसा आखिरी संदेश: मौत के बाद परिवार को उनका एक रिकॉर्डेड मैसेज मिला, जिसमें उन्होंने फैंस का शुक्रिया अदा करते हुए कहा था— ‘आप हैं, जिन्होंने मुझे सुपरस्टार बनाया।’

⏳ कैंसर से जंग, व्हीलचेयर और वो आखिरी शॉट: बाल्कि का वो विज्ञापन
अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद राजेश खन्ना का अभिनय के प्रति जुनून कम नहीं हुआ था। वे अस्पताल के कमरों की बजाय लाइट, कैमरा और एक्शन के बीच जीना चाहते थे:
डॉक्टर्स के खिलाफ जाकर शूटिंग: अप्रैल 2012 में कैंसर के इलाज और हेयरलाइन फ्रैक्चर के दर्द के बीच जब बैंगलोर में एक विज्ञापन की शूटिंग की बात आई, तो डॉक्टर्स ने मना किया था। लेकिन काका अड़ गए। नानावटी अस्पताल से डिस्चार्ज मिलते ही वे सीधे एयरपोर्ट गए। टक्सीडो पहनकर जब वे सेट पर आए और डायरेक्टर आर. बाल्कि ने ‘एक्शन’ कहा, तो काका ने अपनी बुलंद आवाज में कहा— “फैंस क्या होते हैं, मुझसे पूछो… हवा बदल सकती है, लेकिन मेरे फैंस हमेशा मेरे रहेंगे। बाबूमोशाय, मेरे फैंस मुझसे कोई नहीं छीन सकता।” शाम 7 बजे जब पैकअप हुआ, तो पूरी टीम ने खड़े होकर तालियां बजाईं। व्हीलचेयर पर जाते हुए काका ने मुड़कर आखिरी बार अपने सेट को देखा था।
🏡 आशीर्वाद की छत से आख़िरी ‘विक्ट्री साइन’
अस्पताल के चक्करों के बीच काका बार-बार अपने घर लौटने की जिद करते थे। वे कहते थे, “मैं अस्पताल में नहीं मरना चाहता।”
- फैंस से आखिरी मुलाकात: 21 जून को सफेद कुर्ता-पजामा, काला चश्मा और शॉल ओढ़े जब वे आशीर्वाद बंगले की छत पर आए, तो फैंस की चीखें गूंज उठीं। पत्नी डिंपल कपाड़िया, दामाद अक्षय कुमार और दोस्त भूपेश रसीन के साथ खड़े होकर उन्होंने हाथ उठाकर ‘विक्ट्री साइन’ (Victory Sign) बनाया। अगले दिन अखबारों में यही तस्वीर छपी थी, लेकिन इसी के बाद उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और 18 जुलाई को उन्होंने हमेशा के लिए आंखें मूंद लीं।

🎭 जतिन से सुपरस्टार राजेश खन्ना बनने की दास्तान
29 दिसंबर 1942 को अमृतसर में लाला हीरानंद और चंद्रानी के घर जन्मे ‘जतिन’ को विभाजन के वक्त उनके रिश्तेदारों चुन्निलाल और लीलावती खन्ना ने गोद ले लिया और वे बॉम्बे आ गए।
- रईसी में बीता बचपन: गोद लेने वाले पिता रेलवे के बड़े कॉन्ट्रैक्टर थे, इसलिए जतिन का बचपन बेहद ठाठ-बाठ से गुजरा।
- थिएटर का पहला डायलॉग: कॉलेज के दिनों में INT ड्रामा कंपनी से जुड़े जतिन को पहली बार एक बीमार लड़के की जगह डोरमैन का रोल मिला। 3 मई 1961 को नागपुर में प्ले के दौरान घबराहट में उन्होंने डायलॉग बदल दिया और ‘जी हुजूर, साहब घर में हैं’ की जगह ‘जी साहब, हुजूर घर में हैं’ बोल दिया।
- टैलेंट कॉन्टेस्ट से स्टारडम तक: 1965 में फिल्मफेयर ऑल इंडिया टैलेंट कॉन्टेस्ट जीतकर उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। अंकल के कहने पर नाम ‘राजेश खन्ना’ हुआ और 196 debut ‘आखिरी खत’ से हुआ। इसके बाद 1969 में आई ‘आराधना’ ने देश में वो तूफान लाया जिसने 3 सालों में लगातार 17 हिट फिल्में देकर उन्हें हिंदी सिनेमा का पहला ‘सुपरस्टार’ बना दिया।

🍿 दीवानगी के वो किस्से, जो सिर्फ ‘काका’ के नाम हैं
राजेश खन्ना का स्टारडम ऐसा था जिसे आज के दौर में सोच पाना भी नामुमकिन है:
- हावड़ा ब्रिज टूटने का डर: फिल्म अमर प्रेम की शूटिंग के दौरान प्रशासन ने हावड़ा ब्रिज के नीचे नाव से सीन शूट करने की परमिशन सिर्फ इसलिए रोक दी थी क्योंकि उन्हें डर था कि राजेश खन्ना को देखने जुटी भीड़ से ब्रिज न टूट जाए।
- नैनीताल झील को नावों से घेरा: कटी पतंग की शूटिंग के समय नैनी झील के चारों तरफ 3 दिनों तक नावें बांधकर सुरक्षा घेरा बनाया गया था ताकि फैंस की भारी भीड़ से कोई बड़ा हादसा न हो जाए।
- हॉस्पिटल में बुक हुए कमरे: जब काका को पाइल्स के ऑपरेशन के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, तो फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों ने उन्हें स्क्रिप्ट सुनाने की होड़ में उनके कमरे के आसपास के सारे कमरे बुक करवा लिए थे।
- फैन को फूड ट्रक का तोहफा: दिल्ली के एक फैन के फोटो कलेक्शन से प्रभावित होकर काका ने उसे एक फूड ट्रक गिफ्ट किया था, जहां वे खुद 500 से ज्यादा बार खाना खाने गए थे।
- लड़कियों का पागलपन: लड़कियां उनकी कार को चूमकर लिपस्टिक के निशान से लाल कर देती थीं, उनकी तस्वीरों को खून से खत लिखती थीं और थियेटर के बाहर उनकी शर्ट तक फट जाया करती थी।

💔 रिश्तों के उतार-चढ़ाव और आखिरी वक्त में अपनों का साथ
काका की निजी जिंदगी हमेशा सुर्खियों और अकेलेपन के बीच झूलती रही:
- अंजू से लेकर टीना मुनीम तक: करियर की शुरुआत में वे 7 साल तक एक्ट्रेस अंजू महेंद्रू के साथ रिलेशनशिप में रहे। बाद में 1973 में उन्होंने डिंपल कपाड़िया से शादी की (जिनसे ट्विंकल और रिंकी दो बेटियां हुईं)। 1982 में दोनों अलग रहने लगे लेकिन कभी तलाक नहीं लिया। 80 के दशक में टीना मुनीम के साथ उनका रिश्ता रहा, लेकिन डिंपल के वापस आने की उम्मीद में काका ने शादी नहीं की, जिससे टीना अलग हो गईं।
- आखरी दिनों में साथ: सालों अकेले बिताने के बाद जब काका को कैंसर हुआ, तो डिंपल कपाड़िया सब छोड़कर आशीर्वाद बंगले में उनके पास लौट आईं। उनके निधन के समय पत्नी डिंपल, दोनों बेटियां और उनकी पुरानी दोस्त अंजू महेंद्रू भी वहां मौजूद थीं। (इसी बीच अनीता आडवाणी ने भी उनके साथ 8 साल लिव-इन में रहने का दावा कर कोर्ट केस किया था)।




