drnewsindia.com/भोपाल | मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के तहत एक सनसनीखेज धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। ठगों ने एक संगठित गिरोह बनाकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों के जरिए बीमा कंपनियों को करीब 2.50 करोड़ रुपये का चूना लगाया है। पुलिस मुख्यालय की CID (सीआइडी) शाखा ने इस मामले में दो अलग-अलग FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

ऐसे हुआ करोड़ों का खेल (Modus Operandi)
जांच में सामने आया है कि गिरोह ने बेहद शातिराना तरीके से इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया:
- फर्जी बैंक खाते: ग्वालियर, मुरैना और रतलाम जैसे जिलों में फर्जी नामों से सैकड़ों संदिग्ध बैंक खाते खोले गए।
- अनजान बीमा पॉलिसियां: कई लोगों को पता तक नहीं था और उनके नाम पर बीमा पॉलिसी जारी करवा ली गई।
- झूठे डेथ सर्टिफिकेट: बीमा कराने के कुछ महीनों बाद ही जीवित व्यक्तियों के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए गए और क्लेम राशि हड़प ली गई।
- एक ही मोबाइल-ईमेल: सैकड़ों पॉलिसियों में एक ही मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी का उपयोग किया गया, जिससे शक गहराया।

ग्वालियर-मुरैना का पैसा राजस्थान में ठिकाने लगा
विशेष पुलिस महानिदेशक (CID) पंकज श्रीवास्तव के अनुसार, गिरोह ने राशि को छिपाने के लिए एक नेटवर्क बनाया था:

- ग्वालियर और मुरैना के खातों में जैसे ही क्लेम का पैसा आता, उसे राजस्थान के सवाई माधोपुर, गंगानगर या रतलाम के एटीएम से निकाल लिया जाता था।
- पैसा ट्रांसफर करने के लिए ‘म्यूल अकाउंट्स’ (दूसरों के खाते) का इस्तेमाल किया गया।
- संदेहास्पद पैटर्न: कई मामलों में एक ही परिवार के 3 सदस्यों की मौत एक ही हफ्ते में दिखाई गई और सभी की मौत ‘प्राकृतिक’ बताई गई।
क्या है PMJJBY योजना?
- आयु सीमा: 18 से 50 वर्ष।
- प्रीमियम: ₹436 सालाना।
- कवर: मृत्यु की स्थिति में ₹2 लाख का बीमा कवर।
- धोखाधड़ी: इसी ₹2 लाख की राशि को हड़पने के लिए गिरोह ने फर्जीवाड़े का जाल बुना।
अब तक की कार्रवाई
- पुलिस ने कई संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज (Freeze) कर दिया है।
- नगरीय निकायों की भूमिका की भी जांच की जा रही है जहाँ से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हुए।
- CID उन बैंकों और एजेंटों की भी पहचान कर रही है जिन्होंने बिना वेरिफिकेशन के इतनी बड़ी संख्या में खाते और पॉलिसियां जारी कीं।
सावधान रहें: अपनी निजी जानकारी, आधार कार्ड या ओटीपी किसी अनजान व्यक्ति को न दें। आपकी जानकारी के बिना आपके नाम पर भी कोई फर्जीवाड़ा हो सकता है।




