drnewsindia.com/भोपाल | मध्यप्रदेश के लाखों शासकीय सेवकों के लिए तबादला नीति को लेकर बड़ी खबर आ रही है। जहाँ एक ओर कर्मचारी तबादलों पर से बैन हटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, वहीं 1 मई से शुरू हुए जनगणना सर्वे ने इस प्रक्रिया पर संशय के बादल बढ़ा दिए हैं।

तबादला नीति 2026: मुख्य हाइलाइट्स
- सीमित तबादले: यदि प्रतिबंध हटता है, तो केवल 10 प्रतिशत स्थानांतरण की ही अनुमति मिल सकती है।
- प्रभारी मंत्रियों का पावर: कलेक्टर्स के माध्यम से प्रभारी मंत्रियों को प्रस्ताव भेजे जाएंगे, उनकी मंजूरी के बाद ही लिस्ट जारी होगी।
- ऑनलाइन आवेदन: तबादले के इच्छुक उम्मीदवारों से ऑनलाइन आवेदन मांगे जा सकते हैं।
- कैबिनेट का फैसला: मई के दूसरे या तीसरे सप्ताह में मंत्रिपरिषद की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लग सकती है।

जनगणना कार्य बना बड़ी बाधा
प्रदेश में 1 मई से जनगणना का सर्वे शुरू हो चुका है। यह एक ‘टाइम बाउंड’ टास्क है जिसकी मॉनिटरिंग सीधे केंद्र सरकार कर रही है। हर जिले के 15 से 20 प्रतिशत कर्मचारियों की ड्यूटी इस कार्य में लगी है। प्रशासन का मानना है कि इस समय बड़े स्तर पर तबादले करने से जनगणना के काम में रुकावट आ सकती है।
विशेष परिस्थितियों में मिल सकती है छूट
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच हुई बैठक में इस बात पर चर्चा हुई है कि यदि बहुत जरूरी हुआ, तो जून-जुलाई के दौरान एक महीने के लिए बैन हटाया जा सकता है।

जीएडी (GAD) सूत्रों के अनुसार, विभाग को नए सिरे से गाइडलाइन तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि विशेष परिस्थितियों में कर्मचारियों को राहत दी जा सके।
पिछले साल की नीति का असर
वर्ष 2025 में डॉ. मोहन यादव सरकार ने 4 साल बाद नई तबादला नीति लागू की थी। कई कर्मचारी पिछले साल ‘समय सीमा’ (Tenure) पूरी न होने के कारण आवेदन नहीं कर पाए थे। इस साल वे पात्रता की श्रेणी में तो आ गए हैं, लेकिन अब सारा दारोमदार सरकार के फैसले पर टिका है।
क्या कहते हैं राजनीतिक गलियारे?
मंत्रियों और विधायकों ने भी मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि कुछ समय के लिए तबादलों से रोक हटाई जाए। हालांकि, शासन का मुख्य फोकस फिलहाल जनगणना और प्रशासनिक स्थिरता पर है।




