80वां स्वतंत्रता दिवस: राष्ट्रपति के ‘एट होम’ रिसेप्शन कार्ड में दिखेगी 4 राज्यों की कला; बस्तर के 50 कारीगरों ने 3 महीने में किया तैयार

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drnewsindia.com / नई दिल्ली | 15 अगस्त 2026

80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले पारंपरिक ‘एट होम’ (At Home) रिसेप्शन के लिए इस बार एक बेहद खास और अनूठी इनविटेशन किट तैयार की गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा होस्ट किए जाने वाले इस डिनर के आमंत्रण पत्र में छत्तीसगढ़, गोवा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कला परंपराओं का खूबसूरत संगम देखने को मिलेगा।

यह कार्यक्रम 15 अगस्त की शाम राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया जाएगा।

NID और 130 कारीगरों की 3 महीने की मेहनत

इस खास इनविटेशन किट का कॉन्सेप्ट राष्ट्रपति भवन के अधिकारियों और अहमदाबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) की टीम ने मिलकर तैयार किया है।

  • 130 कारीगरों की टीम: इसे बनाने में NID के शिक्षकों, डिजाइनरों और छात्रों के साथ लगभग 130 लोगों ने तीन महीने तक काम किया।
  • बस्तर के 50 कारीगर: NID के निदेशक अशोक मंडल के अनुसार, इस टीम में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके के लगभग 50 आदिवासी कारीगर शामिल हैं।

4 राज्यों की अनूठी लोककला और परंपराओं की झलक

यह इनविटेशन किट केवल एक कार्ड नहीं, बल्कि भारत की पर्यावरण-संरक्षण और लोककला परंपराओं का एक दस्तावेज है:

1. छत्तीसगढ़: ढोकरा और पिटवा शिल्प

  • ढोकरा कास्टिंग: भारत की सबसे पुरानी धातु ढाई परंपराओं में से एक का प्रदर्शन।
  • पिटवा शिल्प: पते की पर्ची के साथ लगी लोहे की घंटी और डिस्प्ले फ्रेम बस्तर के आदिवासी लोहारों ने कबाड़ लोहे (स्क्रैप) को बिना ढलाई के, हाथ से आकार देकर बनाए हैं।

2. गोवा: खजान पारिस्थितिकी तंत्र और अज़ुलेजो पेंटिंग

  • कार्ड पर बनी अज़ुलेजो टाइल पेंटिंग में गोवा की ‘खजान भूमि’ को दर्शाया गया है। यह तटीय आर्द्रभूमि (wetland) है, जिसे समुदाय मिलकर संभालते हैं और यह धान की खेती, मछली पालन व नमक उत्पादन में मदद करती है।

3. महाराष्ट्र: वारली आर्ट और खाम नदी का कायाकल्प

  • महाराष्ट्र की वारली पेंटिंग छत्रपति संभाजीनगर की ‘खाम नदी’ को पुनर्जीवित करने के अभियान को दर्शाती है, जिसे कचरा प्रबंधन और वृक्षारोपण के ज़रिए फिर से जीवंत किया गया।

4. मध्य प्रदेश: भील कला और बीज संरक्षण

  • कार्ड पर बनी भील चित्रकारी मध्य प्रदेश में देसी अनाजों व सब्जियों के बीज बचाने की पारंपरिक प्रथा को दिखाती है। यह कला नीम की टहनियों और बिंदुओं (dots) के जटिल पैटर्न से तैयार की जाती है।

मेहमानों का स्वागत: विशेष महेश्वरी स्टोल

रिसेप्शन में आने वाले मेहमानों का स्वागत एक खास तौर पर तैयार महेश्वरी स्टोल पहनाकर किया जाएगा।

खासियत: मध्य प्रदेश के महेश्वर में रेशम और सूती धागों से हाथ से बुने गए इस एक ही स्टोल में चार राज्यों की बुनाई शैलियों को जोड़ा गया है:

  1. महाराष्ट्र: करवट काठी साड़ी की किनार पट्टी
  2. गोवा: कुणबी साड़ी की रुद्राक्ष पट्टी
  3. मध्य प्रदेश: महेश्वरी बुनाई का कांगड़ा डिजाइन
  4. छत्तीसगढ़: पनिका परंपरा का चिंटा चौक डिजाइन

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