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सीहोर। भीषण गर्मी के बीच सीहोर शहर के नागरिकों को रविवार के दिन दोहरी मार झेलनी पड़ी। एक ओर जहां सूरज के तीखे तेवर लोगों को परेशान कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिजली कंपनी की मनमानी कटौती ने शहर की पेयजल व्यवस्था को ठप कर दिया। दो दिनों के लंबे अंतराल के बाद आज पानी सप्लाई का दिन था, लेकिन बिजली न होने के कारण हजारों घरों तक पानी नहीं पहुँच सका।
इन इलाकों में मचा हाहाकार
बिजली कंपनी द्वारा रविवार सुबह से ही 11 केवीए लूनिया, सुभाष और तहसील फीडर को बंद कर दिया गया। इसके चलते शहर के प्रमुख रिहायशी इलाकों में आपूर्ति बाधित रही:
- लूनिया मोहल्ला, पुराना बस स्टैंड और वाल्मीकि मोहल्ला।
- भोपाली फाटक, पीडब्ल्यूडी क्षेत्र और तहसील चौराहा।
- श्रीराम कॉलोनी, नेहरू कॉलोनी और मछली पूल क्षेत्र।
इन क्षेत्रों में आज सुबह पेयजल सप्लाई होनी थी, लेकिन मोटरें न चल पाने के कारण नल सूखे रहे और लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ा।
नगर पालिका vs बिजली कंपनी: सलाह का खेल
हैरानी की बात यह है कि नगर पालिका प्रशासन ने पेयजल संकट को देखते हुए बिजली कंपनी से कटौती का समय बदलने का अनुरोध किया था। लेकिन, बिजली कंपनी ने राहत देने के बजाय उल्टा नगर पालिका को ही नसीहत दे डाली कि वे अपनी ‘पानी सप्लाई का समय’ बदल लें। विभागों के बीच तालमेल की इस कमी का खामियाजा आम जनता भुगत रही है।
कंपनी का तर्क: पेड़ों की छंटाई है वजह
विद्युत वितरण कंपनी के सहायक अभियंता (AE) अतुलेश सिंह का कहना है कि मानसून पूर्व तैयारी और सुरक्षा के लिहाज से कई स्थानों पर बिजली लाइनों से टकरा रही पेड़ों की डालियों को हटाना जरूरी था। इसी ‘मेंटेनेंस’ कार्य के लिए शटडाउन लिया गया था।
बढ़ता आक्रोश: चक्काजाम के बाद भी नहीं सुधरे हालात
सीहोर में घोषित और अघोषित बिजली कटौती अब एक बड़ी समस्या बन चुकी है। गौरतलब है कि पिछले दिनों मंडी क्षेत्र में नाराज नागरिकों ने अघोषित कटौती के विरोध में चक्काजाम भी किया था। इसके बावजूद कंपनी की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं दिख रहा है। रविवार जैसे अवकाश के दिन, जब लोग घरों पर होते हैं, ऐसी कटौती ने मध्यम और गरीब वर्ग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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