drnewsindia.com/भोपाल। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और टिकाऊ शहरी विकास को लेकर भोपाल में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। ‘मेनस्ट्रीमिंग-एलआईएफईः पर्यावरण अनुकूल टिकाऊ शहरी आवासों का निर्माण’ विषय पर आयोजित इस प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों, शहरी योजनाकारों और नीति विशेषज्ञों ने भाग लिया।

सम्मेलन का आयोजन सोसायटी ऑफ नेचर हीलर्स, कंजर्वेटर्स एंड लोकल टूरिज्म डेवलपमेंट (एसएनएचसी इंडिया) और मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम का आयोजन भोपाल स्थित एपको (एनवायरनमेंटल प्लानिंग एंड को-ऑर्डिनेशन ऑर्गनाइजेशन) में हुआ।
प्रकृति आधारित विकास मॉडल की जरूरत
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे शहरों में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में शहरी विकास योजनाओं में प्रकृति और स्थानीय पारिस्थितिकी को केंद्र में रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के सीईएमडीई के प्रोफेसर डॉ. फैयाज ए. खुसरो ने कहा कि दिल्ली समेत देश के कई बड़े शहर बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरणीय संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने स्थानीय स्तर पर पारिस्थितिकीय समाधान अपनाने पर जोर दिया।
पूर्व विशेष पुलिस महानिदेशक अनुराधा शंकर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जनभागीदारी के बिना पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सकते।
जैव विविधता और हरित क्षेत्रों पर विशेष चर्चा
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ ह्यूमन सेटलमेंट, बेंगलुरु के विशेषज्ञों, वन्यजीव संस्थान, देहरादून के वैज्ञानिकों और अन्य पर्यावरण विशेषज्ञों ने शहरी तापमान वृद्धि, हरित क्षेत्रों में कमी और जैव विविधता संरक्षण जैसे विषयों पर विस्तृत विचार साझा किए।

विशेषज्ञों ने शहरों में देशी प्रजातियों के वृक्षारोपण, ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और वार्ड स्तर पर जैव विविधता रजिस्टर तैयार करने की आवश्यकता बताई। उनका मानना है कि इससे शहरों में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
नदियों और आर्द्रभूमियों के संरक्षण पर जोर
दूसरे तकनीकी सत्र में नदियों, आर्द्रभूमियों और शहरी जल प्रणालियों के संरक्षण को लेकर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने भूजल के अत्यधिक दोहन, अवैध रेत खनन और नदी संरक्षण की चुनौतियों को गंभीर बताते हुए शहरी विकास योजनाओं में जल संसाधनों के संरक्षण को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई।
टिकाऊ और समावेशी शहरों की अवधारणा पर चर्चा

‘सस्टेनेबल सिटी – गवर्नेंस, प्लानिंग एंड कम्युनिटी’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने पक्षी-अनुकूल भवन निर्माण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग, जैव विविधता संरक्षण और समावेशी विकास मॉडल को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
मानव संग्रहालय भ्रमण से मिला व्यवहारिक अनुभव
सम्मेलन के दूसरे दिन प्रतिभागियों ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का भ्रमण किया। इस दौरान पारंपरिक ज्ञान, प्रकृति आधारित जीवनशैली और भारतीय टिकाऊ विकास मॉडल पर विचार-विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने इसे सम्मेलन के उद्देश्यों को जमीनी स्तर पर समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान
सम्मेलन के निष्कर्ष में विशेषज्ञों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और तेजी से बढ़ते शहरीकरण की चुनौतियों का समाधान केवल आधुनिक बुनियादी ढांचे के विस्तार से नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलित विकास मॉडल अपनाने से ही संभव है। उन्होंने पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को जन-आंदोलन बनाने और शहरी विकास के केंद्र में जैव विविधता तथा पारिस्थितिकी को स्थान देने का आह्वान किया।




