भोपाल: फीनिक्स गैस एजेंसी में अवैध वसूली का बड़ा खेल, सस्पेंशन के बाद 12 दिन में ही हुई बहाली

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drnewsindia.com

भोपाल। राजधानी के मीनाल रेसिडेंसी स्थित फिनिक्स गैस एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। खाद्य विभाग की जांच में इस एजेंसी द्वारा उपभोक्ताओं से लाखों रुपए की अवैध वसूली और सुरक्षा राशि के नाम पर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी गड़बड़ियों के बावजूद, सस्पेंड होने के महज 12 दिन बाद ही एजेंसी को दोबारा बहाल कर दिया गया।

हर महीने 2 लाख की अवैध वसूली

जांच रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी होम डिलीवरी के नियमों का उल्लंघन कर रही थी। ग्राहकों को सिलेंडर घर पहुँचाने के बजाय उन्हें खुद ले जाने पर मजबूर किया गया और ‘कैश एंड कैरी’ के नाम पर 34 रुपए अतिरिक्त वसूले गए। आंकड़ों की मानें तो हर महीने लगभग 10 से 12 हजार सिलेंडरों की होम डिलीवरी नहीं की जा रही थी, जिससे एजेंसी प्रतिमाह 2 लाख रुपए की अवैध कमाई कर रही थी।

सुरक्षा राशि के नाम पर 10 लाख का चूना

जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। एजेंसी द्वारा उपभोक्ताओं को सिलेंडर देते समय सुरक्षा निधि (Security Deposit) के नाम पर 236 रुपए प्रति ग्राहक वसूले जा रहे थे। अब तक ग्राहकों से करीब 10 लाख रुपए इसी तरह लिए जा चुके हैं, जो कि नियमों के विरुद्ध है।

बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रहे सिलेंडर

एजेंसी बहाल तो हो गई है, लेकिन उपभोक्ताओं की परेशानियां कम नहीं हुई हैं।

  • केस स्टडी: मनोज नाम के एक ग्राहक ने 28 अप्रैल को सिलेंडर बुक किया था, लेकिन 7 मई तक उनके घर सिलेंडर नहीं पहुँचा।
  • सैकड़ों ग्राहकों को मोबाइल पर ‘सिलेंडर डिलीवर्ड’ के मैसेज तो मिल रहे हैं, पर वास्तव में उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है।

अधिकारियों की ‘मेहरबानी’ पर सवाल

खाद्य विभाग ने 15, 17 और 18 अप्रैल को जांच के बाद कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके आधार पर एजेंसी सस्पेंड हुई थी। लेकिन 6 मई को इसे फिर से चालू कर दिया गया।

फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन का कहना है कि “मामला एडीएम कोर्ट में लंबित है। जिन उपभोक्ताओं के पास सिलेंडर नहीं पहुँचे हैं, वहां तुरंत सप्लाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।”

अब सवाल यह उठता है कि जब एजेंसी नियमों की धज्जियां उड़ा रही थी और ग्राहकों को लूटा जा रहा था, तो इतनी जल्दी बहाली क्यों की गई? फिलहाल, मीनाल क्षेत्र के सैकड़ों उपभोक्ता गैस की किल्लत और एजेंसी की मनमानी से जूझ रहे हैं।


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