अब 10 मिनट में हाईवे पर पहुंचेगी एंबुलेंस! NHAI का बड़ा प्लान, हादसों में बचेंगी हजारों जानें

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drnewsindia.com/नई दिल्ली। देश में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और मौतों के बीच National Highways Authority of India (NHAI) ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर गंभीर हादसों के बाद घायलों को “गोल्डन ऑवर” के भीतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए अब एंबुलेंस रिस्पॉन्स टाइम घटाकर 10 मिनट करने की योजना बनाई जा रही है।

16 हजार किमी हाईवे हिस्सों की पहचान

एनएचएआई ने अपने करीब 80 हजार किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में लगभग 16 हजार किलोमीटर ऐसे हिस्सों की पहचान की है जहां सड़क दुर्घटनाओं की आशंका सबसे अधिक रहती है। इनमें 278 ऐसे ब्लैक स्पॉट शामिल हैं जहां हादसे के बाद एंबुलेंस पहुंचने में 20 से 30 मिनट तक लग जाते हैं।

अब इन संवेदनशील हिस्सों पर एंबुलेंस की तैनाती और मॉनिटरिंग को मजबूत किया जाएगा ताकि घायलों तक समय पर मेडिकल सहायता पहुंच सके।

हादसों में मौत का बड़ा कारण देरी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की “रोड एक्सीडेंट्स इन इंडिया-2023” रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1.50 लाख से ज्यादा सड़क हादसे हुए, जिनमें 63 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई।

विशेषज्ञों के मुताबिक कई मामलों में घायल व्यक्ति अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। ऐसे में दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा यानी “गोल्डन ऑवर” सबसे अहम माना जाता है।

एंबुलेंस की होगी लाइव ट्रैकिंग

नई योजना के तहत हाईवे एंबुलेंस सिस्टम को पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित बनाया जाएगा। एंबुलेंस की लाइव ट्रैकिंग सुविधा शुरू की जाएगी, जो ऐप आधारित कैब सेवा की तरह काम करेगी।

दुर्घटना की सूचना मिलते ही कंट्रोल रूम यह ट्रैक कर सकेगा कि नजदीकी एंबुलेंस कहां है, कितनी देर में पहुंचेगी और कौन सा रूट सबसे तेज होगा। इससे रेस्क्यू सिस्टम अधिक तेज और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।

हाईवे पर बढ़ेंगी एंबुलेंस

वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1,074 एंबुलेंस तैनात हैं। मंत्रालय के मानकों के मुताबिक हर 50-60 किलोमीटर पर एक एंबुलेंस होनी चाहिए। इस हिसाब से 80 हजार किलोमीटर हाईवे नेटवर्क के लिए 1,300 से 1,600 एंबुलेंस की जरूरत मानी जा रही है।

एनएचएआई अब एंबुलेंस की संख्या बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। इन एंबुलेंस में स्ट्रेचर, आपातकालीन दवाएं, आईवी फ्लूइड, इंजेक्शन और ड्रेसिंग सामग्री जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।

डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी सुरक्षा

एनएचएआई हाईवे सुरक्षा के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम भी विकसित कर रहा है। इसमें कोहरा, ओवरस्पीडिंग, गलत लेन ड्राइविंग और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की रियल टाइम निगरानी की जाएगी।

NHAI चेयरमैन ने क्या कहा?

Santosh Kumar Yadav ने कहा कि हाईवे सुरक्षा को केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रखा जा सकता। दुर्घटना के बाद त्वरित मेडिकल सहायता सुनिश्चित करना अब सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

क्या बदलेगी तस्वीर?

यदि यह योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है तो राष्ट्रीय राजमार्गों पर हादसों के बाद होने वाली मौतों में बड़ी कमी आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर इलाज मिलने से हर साल हजारों लोगों की जान बचाई जा सकेगी।

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