मध्य प्रदेश (drnewsindia.com)। मध्य प्रदेश के कोटा रेल मंडल के तहत आने वाले लूणी रीछा और विक्रमगढ़ आलोट स्टेशनों के बीच रविवार तड़के एक बड़ा रेल हादसा हो गया। त्रिवेंद्रम (तिरुवनंतपुरम) से हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली) जा रही राजधानी एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या: 12431) के कोच नंबर B-1 और उसके पीछे लगी जनरेटर यान (SLR कोच) में अचानक भीषण आग लग गई।
गनीमत यह रही कि समय रहते यात्री कोच से बाहर निकल आए, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। हालांकि, अफरा-तफरी के बीच यात्रियों के जरूरी दस्तावेज, लैपटॉप, गहने, नकदी और कपड़े जलकर खाक हो गए।
तड़के 5:15 बजे चीखों से गूंज उठा ट्रैक: चश्मदीदों की जुबानी दर्दनाक दास्तां
सुबह करीब सवा पांच बजे जब ज्यादातर यात्री गहरी नींद में थे, तभी अचानक लगी आग ने बोगियों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे का शिकार हुए यात्रियों ने घटना की जो आपबीती सुनाई, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है:
- मीरा यादव (बड़ौदा से दिल्ली): “अचानक कोच में आग लग गई और चारों तरफ धुआं भर गया। सांस लेना मुश्किल हो रहा था। लोग चिल्ला रहे थे- जल्दी निकलो, जल्दी निकलो! हम किसी तरह बच्चों को उठाकर बाहर भागे, लेकिन हमारे दो बैग अंदर ही छूट गए और जल गए।”
- विरमति (गोवा से दिल्ली): “एक सह-यात्री टॉयलेट के लिए उठे तो उन्होंने धुआं देखा और सबको जगाया। रेलवे स्टाफ ने हमें कोई सूचना नहीं दी थी। हम जान बचाने के लिए नंगे पैर ही ट्रैक के किनारे लगे कांटों और झाड़ियों में कूद गए। हमारे बैग में रखे ₹25,000 से ₹30,000 नकद समेत करीब 80 हजार का नुकसान हुआ है।”
- संजू मिश्रा (सूरत से दिल्ली): “जब सायरन बजा, तब हमारी आंख खुली। हमारे बाहर निकलने के मात्र 15-20 मिनट में ही पूरा डिब्बा धू-धू कर जलने लगा। बैग में रखा सोने का मंगलसूत्र, अंगूठी, झुमके और ₹25,000 कैश सब कुछ जलकर राख हो गया।”
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल: सेना के जवानों ने बचाई जान
इस बड़े हादसे ने भारतीय रेलवे की आपातकालीन तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। सफर कर रहे यात्रियों और सेना के जवानों ने रेलवे प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं:
फायर सिलेंडर नहीं कर रहे थे काम, देरी से बजा अलार्म
कोच में छुट्टी पर घर जा रहे सेना के दो जवान भी सवार थे। आर्मी जवान अरुण भट्ट ने बताया कि कोच के अंदर आग बुझाने के लिए फायर सिलेंडर (अग्निशमन यंत्र) तो मौजूद था, लेकिन वह काम ही नहीं कर रहा था। वहीं, यात्री शहजाद ने बताया कि कोच में धुआं फैलने के काफी देर बाद अलार्म बजा।
अपनी जान की परवाह न करते हुए आर्मी जवान जितेंद्र ने जलते कोच से कई लोगों को सुरक्षित बाहर खींचा। इस रेस्क्यू के दौरान जितेंद्र का पैर चोटिल हो गया और उनका खुद का बैग भी जल गया।
- 3 घंटे देरी से पहुंची दमकल: सूरत से कोटा आ रहे यात्री मोईज बोहरा ने बताया कि सुबह 5 बजे लगी आग को बुझाने के लिए दमकल की गाड़ियां सुबह 8 बजे (करीब 3 घंटे बाद) मौके पर पहुंचीं। तब तक जनरेटर यान और B-1 कोच पूरी तरह खाक हो चुके थे।
- घायलों को नहीं मिली मेडिकल एड: मुंबई से दिल्ली जा रहे अमनदीप ने बताया कि जान बचाने के लिए वो चलती ट्रेन से कूदे, जिससे उनके दोनों पैरों में चोट आई, लेकिन मौके पर कोई प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था नहीं मिली।

कोटा स्टेशन पर यात्रियों का भारी हंगामा, मुआवजे की मांग
हादसे के बाद प्रभावित कोच को ट्रेन से अलग किया गया और ओवरहेड बिजली के टूटे तारों को दुरुस्त कर ट्रेन को कोटा रवाना किया गया। सुबह जब ट्रेन कोटा स्टेशन पहुंची, तो यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा।
- मुआवजे के नाम पर ₹5-5 हजार का लिफाफा: रेलवे प्रशासन ने आक्रोशित यात्रियों को शांत करने के लिए सहायता के तौर पर प्रति यात्री 5-5 हजार रुपये का लिफाफा थमाया, जिसे यात्रियों ने अपने भारी नुकसान के सामने नाकाफी बताया।
- FIR दर्ज करने में आनाकानी: पलवल के यात्री दुष्यंत ने बताया कि उनके सारे ओरिजिनल एजुकेशनल डॉक्यूमेंट्स और लैपटॉप जल गए हैं। कोटा स्टेशन पर एक घंटे तक उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई, जिसके बिना नए दस्तावेज दोबारा नहीं बन सकते। बाद में यात्रियों से केवल आवेदन (एप्लीकेशन) लिया गया।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि आग लगने के कारणों की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जा रही है, ताकि शॉर्ट सर्किट या अन्य संभावित कारणों का पता लगाया जा सके।
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