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सीहोर। “नर सेवा ही नारायण सेवा है” — इस विचार को सीहोर के प्रबुद्ध युवाओं की टोली ‘टीम संडे के सुकून’ ने न केवल सच कर दिखाया है, बल्कि सेवा का एक ऐसा कीर्तिमान रचा है जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गया है।
जिला चिकित्सालय में इलाज कराने आने वाले मरीजों के परिजनों की मदद के लिए शुरू हुआ यह सफर आज निरंतर निशुल्क भोजन वितरण के 500 दिन पूरे कर चुका है। इस पावन अभियान के तहत अब तक 75,000 से अधिक भोजन की थालियां जरूरतमंदों को पूरी श्रद्धा के साथ परोसी जा चुकी हैं।
🌟 इस अभियान की सबसे खास बात: ‘शून्य कचरा’ (Zero-Waste) नीति
इस पूरे सेवा कार्य की सबसे अनूठी बात यह है कि पिछले 500 दिनों में इतनी बड़ी संख्या में भोजन वितरण के बावजूद एक भी दिन सिंगल-यूज प्लास्टिक या डिस्पोजल बर्तनों का उपयोग नहीं किया गया।
- टीम पूरी तरह से ‘जीरो-वेस्ट’ पॉलिसी पर काम करती है।
- हर दिन मरीजों के परिजनों को स्टील की थालियों में ताजा और पौष्टिक भोजन परोसा जाता है।
- यह प्रयास पर्यावरण को प्लास्टिक के कचरे से बचा रहा है और समाज को स्वच्छता व प्रकृति संरक्षण का बड़ा संदेश दे रहा है।
👨⚕️ डॉक्टर, इंजीनियर और युवा व्यवसायियों का अनोखा जज्बा
आमतौर पर आज के युवा संडे यानी रविवार का दिन आराम या मनोरंजन में बिताते हैं, लेकिन इस टीम की कहानी बिल्कुल अलग है। इस ग्रुप में डॉक्टर, इंजीनियर, और युवा व्यवसायी शामिल हैं। इनकी सुबह की शुरुआत ही सेवा कार्यों से होती है। जब दुनिया आराम कर रही होती है, तब ये युवा पूरी ऊर्जा के साथ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की मदद में जुट जाते हैं।

👑 प्रशासनिक अधिकारी भी रह चुके हैं मुरीद
युवाओं के इस अनुशासित और निस्वार्थ जज्बे के सीहोर के आला अधिकारी भी कायल रहे हैं। सीहोर में पदस्थ रहे तत्कालीन कलेक्टर प्रवीण कुमार सिंह और तत्कालीन एसडीएम राजकुमार खत्री सहित अनेक प्रशासनिक अफसर अपने कार्यकाल के दौरान इस टीम के कार्यों और बेहतरीन प्रबंधन की खुले दिल से सराहना कर चुके हैं।
🎂 शहर में बदला उत्सव मनाने का ट्रेंड
‘टीम संडे के सुकून’ ने सीहोर वासियों की सोच को भी बदलने का काम किया है। अब शहर के लोग अपने परिजनों के जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ या पुण्यतिथि होटलों में भारी खर्च करने के बजाय, अस्पताल में जरूरतमंदों को भोजन कराकर मनाते हैं। टीम ऐसे लोगों को एक बेहद सरल, पारदर्शी और अनुशासित प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती है।

🐾 भोजन के साथ-साथ गौ-सेवा, मोक्ष वाहन और बर्तन बैंक की भी कमान
यह टीम केवल अस्पताल तक ही सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर क्षेत्र में योगदान दे रही है:
- गौभोजनम कार्यक्रम: इस तपती दोपहरी और भीषण गर्मी में बेजुबान पशुओं के लिए शहर के हर हिस्से में भोजन और जल कुंड रखे गए हैं। ‘गौ सेवा वाहन’ के जरिए प्रतिदिन सैकड़ों गोवंश के लिए चारा-पानी पहुंचाया जा रहा है।
- निशुल्क मोक्ष वाहन: शोकाकुल परिवारों की सुविधा के लिए पूरी तरह निशुल्क मोक्ष वाहन संचालित किया जाता है।
- बर्तन बैंक की स्थापना: शहर में डिस्पोजल (प्लास्टिक) के उपयोग को जड़ से खत्म करने के लिए टीम ने ‘बर्तन बैंक’ बनाया है, ताकि शादियों और सामाजिक कार्यक्रमों में लोग स्टील के बर्तनों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित हों।
वेबसाइट के लिए क्विक फैक्ट्स (Quick View Box):
| सेवा का नाम | मुख्य उपलब्धि / पहल |
| निशुल्क भोजन | अस्पताल परिसर में निरंतर 500 दिन, 75,000+ थालियां वितरित |
| पर्यावरण संरक्षण | 100% स्टील के बर्तनों का उपयोग, सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पूर्ण रोक |
| बेजुबान जीवों की सेवा | ‘गौभोजनम’ के तहत रोजाना सैकड़ों गोवंश को चारा और पानी |
| सामाजिक पहल | शादियों में डिस्पोजल मुक्त अभियान के लिए ‘बर्तन बैंक’ की शुरुआत |
युवाओं की यह टोली आज सीहोर ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए समाजसेवा, पर्यावरण संरक्षण और युवा शक्ति के सही सदुपयोग की एक सच्ची मिसाल बन चुकी है।





