MP मंडियों में बड़ा बदलाव: अब 30 साल की लीज, ई-नीलामी से होगा दुकान और जमीन आवंटन

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drnewsindia.com /भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने कृषि उपज मंडियों की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने मप्र कृषि उपज मंडी नियम 2009 में संशोधन का मसौदा जारी किया है, जिसके तहत अब मंडियों में जमीन, दुकान और गोदामों का आवंटन पूरी तरह ई-नीलामी के जरिए किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने 30 साल की लीज व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव रखा है।

कृषि विभाग ने 18 मई को ड्राफ्ट जारी करते हुए आम जनता और व्यापारियों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।

अब सीधे नहीं मिलेगा प्लॉट या दुकान

नए नियम लागू होने के बाद मंडियों में भूखंड, दुकान और गोदाम का आवंटन सीधे आवेदन या फॉर्म भरने के आधार पर नहीं होगा। इसके लिए सरकार ई-टेंडर पोर्टल के जरिए ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाएगी।

मंडी समितियों को केवल टेंडर फॉर्म शुल्क तय करने का अधिकार होगा, जो अधिकतम 1000 रुपये और जीएसटी तक हो सकता है।

30 साल की लीज पर मिलेगा आवंटन

नई व्यवस्था के तहत किसी भी प्लॉट, दुकान या गोदाम की बोली मंजूर होने के बाद आवेदक को 30 दिनों के भीतर शेष राशि जमा करनी होगी। इसके बाद मंडी बोर्ड की ओर से 30 वर्षों की लीज जारी की जाएगी।

सरकार का मानना है कि इससे राजस्व बढ़ेगा और आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।

हाई लेवल कमेटी करेगी पूरी प्रक्रिया की निगरानी

ऑनलाइन आवेदन और नीलामी की निगरानी के लिए एक हाई लेवल नीलामी समिति बनाई जाएगी, जिसमें शामिल होंगे—

  • मंडी अध्यक्ष
  • कलेक्टर प्रतिनिधि (डिप्टी कलेक्टर)
  • मंडी बोर्ड के संयुक्त संचालक
  • कार्यपालन यंत्री
  • संबंधित मंडी सचिव

बैठक के लिए कम से कम तीन सदस्यों की मौजूदगी अनिवार्य होगी।

तीसरी बार भी खरीदार नहीं मिला तो 25% कम कीमत पर आवंटन

ड्राफ्ट के अनुसार यदि पहली बार उचित कीमत नहीं मिलती तो दूसरी और तीसरी बार भी ई-टेंडर निकाले जाएंगे।

यदि तीसरी बार भी खरीदार नहीं मिलता है तो मंडी बोर्ड के एमडी की मंजूरी से रिजर्व प्राइस से 25 फीसदी कम कीमत पर आवंटन किया जा सकेगा।

सरकारी विभागों और सहकारी समितियों को बड़ी राहत

नए नियमों में राज्य सरकार, केंद्र सरकार के विभाग, सरकारी निगम-मंडल और पंजीकृत सहकारी संस्थाओं को विशेष छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है।

ऐसी संस्थाओं को ई-नीलामी में भाग लेने की जरूरत नहीं होगी। मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक की मंजूरी के बाद कलेक्टर द्वारा तय कीमत पर सीधे आवंटन किया जा सकेगा।

किराए पर भी दी जा सकेंगी दुकानें और गोदाम

मंडी समितियां चाहें तो बनी हुई दुकानों और गोदामों को अधिकतम तीन साल के लिए किराए पर भी दे सकेंगी।

हालांकि नई व्यवस्था में कई सख्त शर्तें भी जोड़ी गई हैं—

  • एक व्यक्ति या फर्म को सिर्फ एक ही भूखंड, दुकान या गोदाम मिलेगा।
  • आवंटी बिना लिखित अनुमति दुकान या प्लॉट बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकेगा।
  • दुकान को किराए पर देना भी प्रतिबंधित रहेगा।

मंडी बोर्ड के पास 10 हजार से ज्यादा प्रॉपर्टी

राज्य कृषि विपणन बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश की 259 मुख्य मंडियों और 298 उप मंडियों में करीब 9,893 भूखंड उपलब्ध हैं।

इसके अलावा—

  • 2,189 दुकानें
  • 577 गोदाम

मौजूद हैं। इनमें से अधिकांश पहले ही आवंटित किए जा चुके हैं।

बताया जा रहा है कि पुरानी व्यवस्था में अनियमितता और कम कीमत पर आवंटन की शिकायतें सामने आती थीं। नई ऑनलाइन प्रणाली के जरिए सरकार इन शिकायतों पर रोक लगाने की तैयारी में है।

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