drnewsindia.com /भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में बड़े स्तर पर तबादलों की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश के थानों में लंबे समय से एक ही जगह पदस्थ पुलिसकर्मियों को हटाने के लिए डीजीपी कैलाश मकवाना ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार 1 से 5 जून के बीच चार साल से अधिक समय से एक ही थाने में तैनात पुलिसकर्मियों का तबादला किया जाएगा।

यह फैसला थाना स्तर पर पुलिसिंग को अधिक प्रभावी और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
4 साल सामान्य, 5 साल अधिकतम सीमा तय
जारी आदेश के मुताबिक आरक्षक (कॉन्स्टेबल) से लेकर उप निरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) स्तर तक के कर्मचारियों की एक थाने में तैनाती की समयसीमा तय कर दी गई है।
नए नियम के अनुसार—
- किसी थाने में सामान्य रूप से 4 साल तक ही पदस्थ रह सकेंगे।
- विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 5 साल तक तैनाती संभव होगी।
- इसके बाद संबंधित पुलिसकर्मी का तबादला अनिवार्य होगा।
डीजीपी ने स्पष्ट किया है कि एक ही स्थान पर लंबे समय तक पदस्थ रहने से कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, इसलिए समय-समय पर बदलाव जरूरी है।
एक बार हटे तो 3 साल तक नहीं मिलेगी उसी थाने में पोस्टिंग

नए आदेश में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा गया है। यदि किसी पुलिसकर्मी का एक थाने से तबादला हो जाता है तो उसे कम से कम तीन साल तक उसी थाने में दोबारा पदस्थ नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा कॉन्स्टेबल से लेकर सब-इंस्पेक्टर तक कोई भी कर्मचारी एक ही सब-डिवीजन के अलग-अलग थानों में 10 साल से अधिक समय तक तैनात नहीं रह सकेगा। ऐसे कर्मचारियों के भी तबादले किए जाएंगे।
2025 में भी हुए थे बड़े पैमाने पर ट्रांसफर

गौरतलब है कि वर्ष 2025 में भी पुलिस मुख्यालय ने इसी तरह का आदेश जारी किया था, जिसके बाद प्रदेशभर में 11 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों के तबादले किए गए थे।
अब एक बार फिर बड़े स्तर पर फेरबदल होने से पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है।
मंडला-बालाघाट से 59 सब-इंस्पेक्टरों का तबादला

इधर पुलिस मुख्यालय ने मंडला और बालाघाट जिलों में पदस्थ 59 सब-इंस्पेक्टरों के तबादले भी कर दिए हैं। इन अधिकारियों को प्रदेश के अलग-अलग जिलों और पुलिस इकाइयों में भेजा गया है।
वहीं अगले दो वर्षों के लिए प्रदेश की विभिन्न इकाइयों से 59 नए सब-इंस्पेक्टरों की तैनाती मंडला और बालाघाट में की गई है।
नक्सलवाद खत्म, फिर भी सूची से बाहर नहीं हुए जिले
गौरतलब है कि प्रदेश में दिसंबर 2025 में नक्सलवाद खत्म होने की घोषणा की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद मंडला और बालाघाट को अभी तक पुलिस की नक्सल प्रभावित जिलों की सूची से बाहर नहीं किया गया है।
ऐसे में इन जिलों में लगातार पुलिस बल की तैनाती और अदला-बदली जारी है।
पुलिस विभाग में बढ़ेगी हलचल
DGP के इस फैसले के बाद प्रदेशभर के थानों में बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। माना जा रहा है कि इससे पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर बेहतर कानून व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।




