drnewsindia.com/भोपाल।
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती दो महीनों में ही रिकॉर्ड कर्ज लेने की राह पर है। मई के आखिरी सप्ताह में सरकार एक बार फिर बाजार से 2800 करोड़ रुपए का बड़ा कर्ज उठाने जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ‘ई-कुबेर’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से बॉन्ड्स की नीलामी कर यह राशि जुटाई जाएगी।
इस नए कर्ज के साथ ही, महज दो महीनों (अप्रैल और मई) के भीतर सरकार द्वारा लिए गए कुल कर्ज का आंकड़ा 9200 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
दो अलग-अलग किस्तों में मिलेगा कर्ज, 2048 तक रहेगी अवधि

वित्त विभाग द्वारा राजपत्र में जारी अधिसूचना के अनुसार, यह कर्ज ‘मध्य प्रदेश राज्य विकास ऋण’ के तहत लिया जा रहा है। इसकी प्रक्रिया 27 मई 2026 तक पूरी कर ली जाएगी। सरकार इस कर्ज को दो किस्तों में ले रही है:
| कर्ज की राशि | ब्याज दर (अनुमानित) | भुगतान की अवधि |
| ₹1,600 करोड़ | 7.64 प्रतिशत | वर्ष 2034 तक (10 साल) |
| ₹1,200 करोड़ | 7.83 प्रतिशत | वर्ष 2048 तक (22 साल) |
इन दोनों कर्जों की अदायगी सरकार द्वारा छह-माही किस्तों में हर साल अप्रैल और अक्टूबर के महीने में की जाएगी।
इस बार अप्रैल से ही कर्ज की जरूरत क्यों पड़ी?
आर्थिक मामलों के जानकारों के मुताबिक, अमूमन राज्य सरकारें नए वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों में कर्ज लेने से बचती हैं और यह प्रक्रिया मई के अंत या जून से शुरू होती है। लेकिन इस बार ट्रेंड बदला हुआ है।
- अप्रैल 2026: सरकार ने दो बार में चार किस्तों के जरिए कुल ₹4600 करोड़ का ऋण लिया।
- मई 2026 (शुरुआत): सरकार ने बाजार से ₹1800 करोड़ का कर्ज उठाया।
- मई 2026 (अंत): अब ₹2800 करोड़ का नया कर्ज लिया जा रहा है।

कहाँ खर्च होगी यह भारी-भरकम राशि?
लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर विपक्ष के हमलों के बीच सरकार ने साफ किया है कि इस राशि का उपयोग केवल प्रशासनिक खर्चों के लिए नहीं, बल्कि राज्य के विकास के लिए किया जा रहा है। सरकार के मुताबिक, बॉन्ड से मिलने वाले पैसे को निम्नलिखित क्षेत्रों में निवेश किया जाएगा:
- सिंचाई और जल संसाधन परियोजनाएं
- ऊर्जा (बिजली) और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास
- कृषि और ग्रामीण विकास योजनाएं
- उत्पादक पूंजीगत कार्य (Capital Expenditure)
क्या कहते हैं बजट के आंकड़े?
राजपत्र में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान में मध्य प्रदेश की कुल राजस्व प्राप्ति (Revenue Receipts) लगभग 2.79 लाख करोड़ रुपए थी, जबकि राजस्व व्यय (Revenue Expenditure) भी लगभग 2.79 लाख करोड़ रुपए ही आंका गया था। इस संतुलन को बनाए रखने और नई विकास योजनाओं को गति देने के लिए सरकार को बाजार से लगातार पूंजी उठानी पड़ रही है।




