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नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की एक नई किताब ने देश के राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। मंगलवार (26 मई) को दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा और पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने शिवराज सिंह चौहान द्वारा लिखित पुस्तक ‘अपनापन: नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’ का विमोचन किया।
इस किताब में शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने 35 साल के लंबे अनुभवों और कई ऐसी अनसुनी कहानियों को साझा किया है, जो अब तक आम जनता की नजरों से दूर थीं। 2023 के विधानसभा चुनाव के तनाव से लेकर पर्सनल लाइफ के कई भावुक किस्सों तक, इस किताब में कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं।
आइए जानते हैं शिवराज सिंह चौहान की किताब ‘अपनापन’ की 10 सबसे बड़ी और मुख्य बातें:
1. जब टिकट कटने की अफवाहों के बीच आया PM मोदी का फोन
2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के समय जब भाजपा की पहली सूची में शिवराज सिंह चौहान का नाम नहीं था, तब विपक्ष ने उनके एक बयान को लेकर उनके राजनीतिक अंत की भविष्यवाणियां शुरू कर दी थीं। कांग्रेस नेता तंज कस रहे थे। इसी तनावपूर्ण माहौल में पीएम मोदी का शिवराज को फोन आता है।
मोदी जी ने बातचीत की शुरुआत करते हुए कहा— “मैं मुख्यमंत्री से बात नहीं कर रहा, मैं अपने शिवराज से बात कर रहा हूं।” उन्होंने बड़े भाई की तरह शिवराज को कुछ दिन एकांत में जाकर मन शांत करने की सलाह दी। इस फोन कॉल ने शिवराज का मनोबल बढ़ाया, जिसके बाद उन्होंने उत्तराखंड से लौटकर महज दो हफ्तों में 165 से ज्यादा चुनावी सभाएं कर डालीं।
2. पहलगाम हमले के बाद PM का संकल्प: “इस बार ऑपरेशन अलग होगा”
किताब की शुरुआत अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद की एक कैबिनेट बैठक से होती है। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। सऊदी अरब का दौरा बीच में छोड़कर लौटे पीएम मोदी के चेहरे पर न गुस्सा था न बेचैनी, बल्कि एक गहरा संयम था। उन्होंने बैठक में कहा था— “इस बार का ऑपरेशन अलग होगा। यह सर्जिकल और एयरस्ट्राइक से भी अलग होगा। जिन्होंने यह किया है, उनके आकाओं को नहीं छोड़ेंगे।”

3. 1990 के दशक में जब बाबूलाल गौर ने उड़ाया था ईमेल का मजाक
1998 में जब नरेंद्र मोदी मध्य प्रदेश के संगठन प्रभारी थे, तब उन्होंने एक बैठक में कार्यकर्ताओं से पूछा था कि किसके पास ईमेल आईडी है? इस पर वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर ने मजाक में कहा था— “ईमेल-फीमेल करते रहते हैं, इससे क्या होगा?” तब बैठक में ठहाके लगे थे, लेकिन मोदी जी उस दौर में भी समझ चुके थे कि आने वाला समय तकनीक का ही है।
4. कोविड अस्पताल में भर्ती ‘शिवराज’ को आया फोन
जब शिवराज सिंह चौहान खुद कोरोना संक्रमित होकर अस्पताल में भर्ती थे, तब पीएम मोदी ने फोन कर उनका हाल जाना। उन्होंने सिर्फ औपचारिकता नहीं निभाई, बल्कि शिवराज का ऑक्सीजन लेवल, दवाएं और डॉक्टरों की रिपोर्ट तक की व्यक्तिगत रूप से जानकारी ली।

5. पिता के निधन पर सबसे पहला सांत्वना कॉल
साल 2019 में जब शिवराज सिंह चौहान के पिता का निधन हुआ, तो सबसे पहला शोक संदेश और फोन कॉल प्रधानमंत्री मोदी का था। उन्होंने राजनीति की व्यस्तताओं के बीच एक पारिवारिक सदस्य की तरह शिवराज के पूरे परिवार का ढांढस बंधाया था।
6. बेटों की शादी के कार्ड पर 40 मिनट तक डेयरी बिजनेस की चर्चा
साल 2025 में जब शिवराज अपने बेटों की शादी का कार्ड देने पीएम मोदी के पास पहुंचे, तो उन्हें लगा था कि मुलाकात सिर्फ कुछ मिनटों की होगी। लेकिन पीएम मोदी ने 40 मिनट तक बैठकर बातचीत की। उन्होंने शिवराज के बेटों के डेयरी बिजनेस में इतनी रुचि ली कि गाय की नस्ल, दूध उत्पादन और प्रोडक्ट्स तक के बारे में पूरी डिटेल पूछी।

7. “मुझे एयरपोर्ट छोड़ने मत आओ, निवेशकों के बीच रहो”
2014 में इंदौर में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान जब शिवराज प्रोटोकॉल के तहत पीएम मोदी को सी-ऑफ करने एयरपोर्ट जा रहे थे, तब मोदी जी ने उनका हाथ पकड़कर रोक दिया। उन्होंने कहा— “आप यहीं डेलीगेट्स के बीच रहिए, इससे प्रदेश को ज्यादा फायदा होगा।” ऐसा ही वाकया उज्जैन में ‘महाकाल लोक’ के लोकार्पण के समय भी हुआ था।
8. दो दशक बाद भी पहचान लिया पुराने ‘रसोइये’ को
2023 में हरियाणा के झज्जर की एक रैली के दौरान पीएम मोदी की नजर ‘दीपक कुमार’ नाम के एक पुराने कार्यकर्ता पर पड़ी, जो 1990 के दशक में हरियाणा भाजपा कार्यालय में मोदी जी के लिए खिचड़ी-दलिया बनाया करते थे। 20 साल बाद भी पीएम मोदी ने उन्हें मंच से उतरकर गले लगाया।

9. ट्रम्प टैरिफ विवाद: “किसानों के हित से समझौता नहीं”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ हुए टैरिफ विवाद के समय जब कयास लगाए जा रहे थे कि भारत झुक सकता है, तब कैबिनेट बैठक में पीएम मोदी ने दो टूक कहा था— “किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा, चाहे इसके लिए कोई भी राजनीतिक कीमत क्यों न चुकानी पड़े।”
10. रेहड़ी-पटरी वालों को ‘स्ट्रीटप्रेन्योर’ का सम्मान
कोविड के समय शुरू हुई ‘पीएम स्वनिधि योजना’ का जिक्र करते हुए शिवराज लिखते हैं कि पीएम मोदी ने रेहड़ी-पटरी (स्ट्रीट वेंडर्स) वालों को सिर्फ लोन नहीं दिया, बल्कि समाज में एक नई पहचान दी। मोदी जी की सोच थी कि इन्हें ‘लाभार्थी’ नहीं बल्कि ‘स्ट्रीटप्रेन्योर’ के रूप में देखा जाना चाहिए।




