drnewsindia.com राजगढ़/खिलचीपुर। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के खिलचीपुर से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक बेटे पर अपने ही पिता को सरकारी दस्तावेजों में मृत (स्वर्गीय) दर्शाकर उनकी संपत्ति हड़पने और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाखों रुपये का बैंक लोन लेने का आरोप लगा है। मामले का खुलासा होने के बाद बैंकिंग व्यवस्था, दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया और सरकारी तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, पीड़ित पिता ने पारिवारिक विवादों और रोजाना होने वाले झगड़ों से परेशान होकर वर्ष 2020 में अपना घर छोड़ दिया था और किराए के मकान में रहने लगे थे। इस दौरान उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उनके नाम और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों का कथित रूप से दुरुपयोग किया जा रहा है।
बैंक पहुंचते ही खुला पूरा मामला
18 मई 2026 को पीड़ित आगर स्थित एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक पहुंचे। वहां अपनी पहचान बताकर जब उन्होंने लोन से संबंधित दस्तावेजों की जानकारी ली तो उनके होश उड़ गए। बैंक रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्शाया गया था और उनकी संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लोन लिया जा चुका था।

20 लाख का लोन, दूसरे बैंक से भी कर्ज
जांच में सामने आया कि आरोपी यश गुप्ता ने कथित रूप से किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति को अपनी बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और 31 अगस्त 2024 को अपनी मां के साथ संयुक्त नाम से एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से 20 लाख रुपये का लोन प्राप्त कर लिया। आरोप है कि वह अन्य बैंक से भी कर्ज लेकर डिफॉल्टर घोषित हो चुका है। कुल मिलाकर दो बैंकों से लगभग 25 लाख रुपये का ऋण लेने की बात सामने आई है।
दो आधार कार्ड होने का भी आरोप

पीड़ित पिता का दावा है कि आरोपी बेटे के पास अलग-अलग पते वाले दो आधार कार्ड हैं, जिनका उपयोग विभिन्न दस्तावेजों में किया गया। मामले की जांच में यह पहलू भी शामिल किया गया है।
श्मशान घाट रिकॉर्ड से खुली फर्जीवाड़े की परत

मामले में नया मोड़ तब आया जब श्मशान घाट से जुड़े रिकॉर्ड और कर्मचारियों की जानकारी के आधार पर कई दस्तावेजों पर सवाल उठे। जांच के दौरान नगर परिषद स्तर पर जारी किए गए कुछ प्रमाण पत्रों की सत्यता पर भी संदेह जताया गया।
नगर परिषद ने दस्तावेज बताए फर्जी
खिलचीपुर नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) देव नारायण दांगी ने प्रारंभिक जांच में संबंधित दस्तावेजों और प्रमाण पत्रों को फर्जी बताया है। उनका कहना है कि नगर परिषद कार्यालय द्वारा ऐसे दस्तावेज जारी नहीं किए गए हैं और मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है।
जांच के घेरे में कई सवाल
मामले के सामने आने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं—
- बिना मौके पर सत्यापन किए बैंक ने 20 लाख रुपये का लोन कैसे स्वीकृत कर दिया?
- नगर परिषद की कथित नकली सील और दस्तावेज तैयार करने में कौन-कौन शामिल हैं?
- संपत्ति और मृत्यु संबंधी रिकॉर्ड का सत्यापन किस आधार पर किया गया?
- यदि दस्तावेज फर्जी थे तो बैंक और अन्य संबंधित संस्थाओं ने उनकी जांच क्यों नहीं की?
पुलिस और प्रशासनिक जांच जारी
मामला सामने आने के बाद पुलिस, बैंक प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों की जांच की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो फर्जीवाड़ा, धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग सहित कई गंभीर धाराओं में कार्रवाई हो सकती है।
यह मामला न केवल पारिवारिक विश्वास को तोड़ने वाला है, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड और बैंकिंग सिस्टम की जांच प्रक्रिया पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।




