सीहोर: वीआईपी इलाके में ‘लापरवाही का ५० मीटर’, कलेक्टर बंगले के पास बदहाल सड़क; क्या प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है?

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drnewsindia.com / सीहोर। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच सीहोर शहर के दिल कहे जाने वाले इलाके से प्रशासनिक लापरवाही की एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। मनकामेश्वर मंदिर से बाल विहार ग्राउंड तक का लगभग मात्र 50 मीटर लंबा मार्ग इन दिनों शहरवासियों के लिए मुसीबत का सबब बन चुका है। नगर पालिका, पीएचई (PHE) और संबंधित विभागों ने पाइपलाइन डालने के नाम पर इस सड़क को कई बार खोदा, लेकिन काम खत्म होने के बाद हर बार मरम्मत को अधूरा छोड़ दिया गया।

हैरानी की बात यह है कि यह बदहाल सड़क कलेक्टर निवास की बिल्कुल बगल में और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के ठीक सामने है। जब वीआईपी इलाके का यह हाल है, तो बाकी शहर की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

🚨 लगातार दूसरे दिन हादसा: बीच सड़क फंसी ट्रॉलियां

खोदे गए गड्ढों और मिट्टी के ढेरों के कारण यहाँ रोजाना ट्रैफिक जाम और हादसे हो रहे हैं:

  • 01 जून: सड़क के बीचों-बीच खोदे गए गड्ढे में एक किसान की ट्रैक्टर-ट्रॉली फंस गई।
  • 02 जून: ठीक अगले ही दिन फिर से एक अन्य ट्रॉली उसी जगह फंस गई, जिससे घंटों लंबा ट्रैफिक जाम लगा रहा और राहगीर परेशान होते रहे।

वर्तमान में इस मार्ग पर सिर्फ गहरे गड्ढे, कीचड़, उड़ती धूल और बीच रास्ते पर पड़े मिट्टी के ढेर नजर आ रहे हैं।

⚠️ देश में हुए हादसों से भी नहीं लिया सबक?

यह लापरवाही इसलिए और भी डरावनी है क्योंकि देश में हाल ही के महीनों में ऐसी ही लापरवाइयों के कारण मासूमों की जान जा चुकी है:

  • नोएडा में निर्माण कार्य के लिए खोदे गए असुरक्षित गड्ढे के कारण एक युवा इंजीनियर की मौत हो गई थी।
  • दिल्ली में भी इसी तरह खोदे गए गड्ढे में गिरने से एक युवक की जान चली गई थी।

इन राष्ट्रीय घटनाओं से सबक लेने के बजाय सीहोर का स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग गहरी नींद में सोए हुए हैं।

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