स्वास्थ्य मंत्रालय का बड़ा फैसला: अब बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेगी कफ सिरप, सरकार ने कड़े किए नियम

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drnewsindia.com

नई दिल्ली। देश में दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग (Drug Abuse) को रोकने और आम नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बेहद कड़ा और बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय द्वारा जारी नए नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब देश के किसी भी मेडिकल स्टोर या फार्मेसी पर कफ सिरप (खांसी की दवाई) सहित सभी प्रकार के मेडिसिनल सिरप बिना डॉक्टर की वैध पर्ची (Valid Prescription) के नहीं बेचे जा सकेंगे।

सरकार का यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसका सीधा असर मेडिकल स्टोर्स और उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ेगा।

🚫 क्यों लिया गया यह सख्त फैसला?

पिछले कुछ समय से बाजार में उपलब्ध विभिन्न कफ सिरप और मेडिसिनल सिरप का नशे या अन्य गलत कामों के लिए दुरुपयोग किए जाने के मामले सामने आ रहे थे। इसके अलावा, बिना डॉक्टरी सलाह के खुद से दवा लेने (Self-Medication) की आदत के कारण लोगों के स्वास्थ्य, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिवर व किडनी पर विपरीत असर पड़ रहा था।

इसी सुरक्षा जोखिम को कम करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह सख्त गाइडलाइन जारी की है।

📋 क्या बदल जाएगा इस नियम के बाद?

  • नो पर्ची, नो सिरप: अब यदि आप सूखी या गीली खांसी के लिए कोई भी सिरप खरीदने मेडिकल स्टोर जाएंगे, तो आपको डॉक्टर द्वारा लिखी गई पर्ची दिखाना अनिवार्य होगा।
  • मेडिकल स्टोर्स पर सख्ती: बिना पर्ची के सिरप बेचने वाले मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उनका लाइसेंस भी रद्द हो सकता है।
  • रिकॉर्ड रखना होगा जरूरी: कफ सिरप की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड और डॉक्टर की पर्ची की डिजिटल या फिजिकल कॉपी फार्मासिस्ट को अपने पास सुरक्षित रखनी होगी।

“यह कदम देश में सुरक्षित चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने और ओटीसी (Over-the-Counter) दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। नागरिकों से अपील है कि वे स्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए इस निर्णय में सहयोग करें।”

स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार

📌 नए नियम: एक नजर में (Quick Takeaways)

मुख्य बिंदुनया नियम / विवरण
क्या प्रतिबंध है?बिना डॉक्टर की पर्ची के किसी भी प्रकार का मेडिसिनल/कफ सिरप बेचना।
किसे मिलेगी छूट?केवल उन मरीजों को जिनके पास डॉक्टर का प्रमाणित और वैध प्रिस्क्रिप्शन होगा।
मुख्य उद्देश्यदवाओं के दुरुपयोग (Misuse) को रोकना और ‘Self-Medication’ पर लगाम लगाना।
कार्रवाईनियम तोड़ने वाले मेडिकल स्टोर्स पर भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्दीकरण।

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