भारत का 101वां रामसर स्थल: अरुणाचल प्रदेश की ‘ग्लॉ झील’ को मिला अंतरराष्ट्रीय दर्जा

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केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने घोषणा की है कि अरुणाचल प्रदेश में स्थित ग्लॉ झील (Glaw Lake) को भारत के 101वें रामसर स्थल (Ramsar Site) के रूप में नामित किया गया है। यह उपलब्धि जैव विविधता संरक्षण, जल सुरक्षा और जलवायु स्थिरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • 101वां रामसर स्थल: ग्लॉ झील (Glaw Lake) भारत का 101वां रामसर स्थल बनी।
  • राज्य का पहला स्थल: यह अरुणाचल प्रदेश का पहला रामसर स्थल (आद्रभूमि) है।
  • स्थिति: पूर्वी हिमालय में कमलांग टाइगर रिजर्व एवं वन्यजीव अभयारण्य (Kamlang Tiger Reserve) के भीतर स्थित।
  • उपलब्धियां: 2014 में भारत में 26 रामसर स्थल थे, जो अब बढ़कर 101 हो गए हैं।

1. ग्लॉ झील की समृद्ध जैव विविधता

पूर्वी हिमालय के बीच बसी ग्लॉ झील एक मीठे पानी की बेहद खूबसूरत और प्राचीन (pristine) झील है, जो अपनी समृद्ध वनस्पतियों और जीवों के लिए जानी जाती है:

  • पेड़ और ऑर्किड: झील और इसके जलग्रहण (catchment) क्षेत्र में 150 से अधिक पेड़ों की प्रजातियां और 49 ऑर्किड की प्रजातियां दर्ज की गई हैं।
  • संरक्षित क्षेत्र: यह झील कमलांग टाइगर रिजर्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो कई दुर्लभ वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है।

2. भारत: आर्द्रभूमि संरक्षण में वैश्विक लीडर

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस उपलब्धि को देश के लिए गर्व का क्षण बताया:

“यह मील का पत्थर दर्शाता है कि भारत आर्द्रभूमि संरक्षण (Wetland Conservation) में वैश्विक लीडर के रूप में उभरा है। 2014 में देश में केवल 26 रामसर स्थल थे, जो आज बढ़कर 101 हो गए हैं। यह यात्रा पर्यावरण सुरक्षा और सतत विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”

3. रामसर स्थल के रूप में नामांकन का महत्व

ग्लॉ झील को रामसर सूची में शामिल किए जाने से निम्नलिखित लाभ होंगे:

  • अंतरराष्ट्रीय पहचान: झील के पारिस्थितिक तंत्र को वैश्विक स्तर पर संरक्षण और फंडिंग में प्राथमिकता मिलेगी।
  • स्थानीय समुदाय का सशक्तिकरण: प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के साथ-साथ झील पर निर्भर स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका (Sustainable Livelihoods) के नए रास्ते खुलेंगे।

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