भोपाल: होटल रेडिसन पर उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला, MRP से ज़्यादा दाम पर टैक्स वसूलना पड़ा भारी

0
6

drnewsindia.com

भोपाल। क्या होटल या रेस्टोरेंट में पानी की बोतल या अन्य पैकेज्ड आइटम पर एमआरपी (MRP) से ज़्यादा पैसे वसूलना सही है? इस पर जिला उपभोक्ता आयोग ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। भोपाल के मशहूर होटल रेडिसन द्वारा ₹60 की पानी की बोतल पर ₹175 वसूलने और उस पर अलग से जीएसटी (GST) लगाने के मामले में आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है।

उपभोक्ता आयोग ने आदेश दिया है कि होटल प्रबंधन शिकायतकर्ता को अतिरिक्त वसूले गए ₹10.80 लौटाए, ₹5,000 मानसिक प्रताड़ना और ₹3,000 वाद व्यय (कोर्ट खर्च) के रूप में भुगतान करे। यदि तय समय में यह भुगतान नहीं किया गया, तो होटल को 9% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

📌 क्या था पूरा मामला?

यह मामला अप्रैल 2022 का है। रायसेन रोड निवासी हुकुम सिंह ठाकुर अपने चार साथियों के साथ होटल रेडिसन में बुफे डिनर के लिए गए थे। डिनर के दौरान उन्होंने मिनरल वॉटर की एक बोतल ली, जिस पर एमआरपी ₹60 दर्ज थी।

  • बिल में खेल: जब बिल आया तो कुल राशि ₹6,809.88 थी, जिसमें पानी की बोतल की कीमत ₹175 जोड़ी गई थी।
  • बहस और बदसलूकी: पानी की कीमत पर आपत्ति जताने पर होटल स्टाफ ने उनके साथ बहस और अभद्र व्यवहार किया। होटल प्रबंधन द्वारा राशि वापस न करने पर हुकुम सिंह ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया, जिस पर जून 2026 में फैसला आया।

⚖️ कोर्ट में होटल की दलील बनाम आयोग का फैसला

मामले की सुनवाई के दौरान होटल प्रबंधन और उपभोक्ता आयोग के बीच दिलचस्प तर्क-वितर्क देखने को मिले:

🏢 होटल प्रबंधन का तर्क

“होटल और रेस्टोरेंट में बेची जाने वाली वस्तुएं सिर्फ एक प्रोडक्ट नहीं होतीं। ग्राहकों को एयर कंडीशनिंग, बैठने की आलीशान सुविधा, लाउंज, म्यूज़िक और शानदार सर्विस जैसी आतिथ्य सेवाएं दी जाती हैं। इसलिए मेन्यू कार्ड की कीमतें ही लागू होती हैं, रिटेल दुकान की एमआरपी नहीं।”

👨‍⚖️ उपभोक्ता आयोग का निर्णय (फैसले की मुख्य बातें)

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों (जैसे FHRAI बनाम केंद्र सरकार) का हवाला देते हुए होटल की बात को आंशिक रूप से सही माना, लेकिन टैक्स वसूली में गलती पकड़ी:

  • MRP से ज़्यादा लेना अवैध नहीं: आयोग ने माना कि होटल, रेस्टोरेंट या एयरलाइंस जैसी जगहें ग्राहकों को केवल सामान नहीं बल्कि ‘सर्विस’ देती हैं, इसलिए एमआरपी से अधिक कीमत लेना अपने आप में अवैध नहीं है।
  • अतिरिक्त GST वसूलना गलत: आयोग ने स्पष्ट किया कि होटल ने जो ₹175 की कीमत तय की थी, जीएसटी उसी के अंदर शामिल माना जाएगा। उस ₹175 पर अलग से 18% जीएसटी (₹10.80) वसूलना पूरी तरह से ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ और सेवा में कमी है।

🗣️ “लड़ाई ₹10 की नहीं, उपभोक्ता अधिकारों की है”

परिवादी पक्ष के वकील शशिकांत वर्मा ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह मामला सिर्फ ₹10.80 की हेराफेरी का नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों उपभोक्ताओं के अधिकारों से जुड़ा है। अक्सर बड़े होटल सुविधाओं के नाम पर मनमानी टैक्स वसूली करते हैं। यह फैसला आम जनता को संदेश देता है कि गलत प्रथाओं के खिलाफ आवाज़ उठाने पर न्याय ज़रूर मिलता है।

वहीँ शिकायतकर्ता हुकुम सिंह का कहना है कि उन्हें इस फैसले से आंशिक राहत मिली है क्योंकि एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने को कोर्ट ने जायज़ ठहरा दिया, लेकिन अवैध टैक्स वसूली पर होटल की क्लास ज़रूर लग गई है।

ऐसी ही और भी दिलचस्प और काम की खबरों के लिए जुड़े रहिए हमारी वेबसाइट के साथ!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here