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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित पॉश ‘समिट बिल्डिंग’ में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर चल रहे एक आलीशान फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर पर छापेमारी की। बुधवार दोपहर हुए इस बड़े एक्शन में पुलिस ने 27 युवतियों सहित कुल 119 लोगों को हिरासत में लिया है।
पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र कुमार सेंगर ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि यह गैंग कॉल सेंटर की आड़ में अमेरिकी नागरिकों से अब तक 200 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी कर चुका है। मौके से 100 लैपटॉप, 178 कॉलिंग फोन और कई डिजिटल मशीनें व दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
🔥 इस मेगा रेड और ठगी के 5 सबसे बड़े खुलासे:
- सालाना 3 करोड़ का खर्च: यह शातिर गैंग समिट बिल्डिंग में दो बड़े ऑफिस किराए पर लेकर ‘Solaris Solution’ नाम की फर्जी कंपनी चला रहा था, जिसका सालाना खर्च ही करीब 3 करोड़ रुपए था।
- 5 राउंड इंटरव्यू के बाद सिलेक्शन: इस कॉल सेंटर में बकायदा 5 राउंड के कड़े इंटरव्यू के बाद पढ़े-लिखे युवाओं को नौकरी पर रखा जाता था।
- रोजाना 40 लाख की कमाई: यह कॉल सेंटर शाम 7 बजे से रात 3 बजे तक (अमेरिकी समयानुसार) एक्टिव होता था। यहां से रोज करीब 35 से 40 लाख रुपए की ठगी की जा रही थी।
- सैलरी कैश में, 10% इनसेंटिव: काम करने वाले युवाओं को 34,000 से 40,000 रुपए महीना फिक्स सैलरी कैश में मिलती थी। साथ ही हर शिकार फंसाने पर ठगी गई रकम का 10% इनसेंटिव मिलता था, जिससे हर कर्मचारी महीने के 80 हजार से 1 लाख रुपए कमा रहा था।
- नॉर्थ-ईस्ट की लड़कियां थीं मुख्य हथियार: गैंग में सबसे ज्यादा नॉर्थ-ईस्ट की लड़कियां शामिल थीं। उनकी फर्राटेदार अंग्रेजी और बेहतरीन ‘अमेरिकन एक्सेंट’ (Accent) के कारण विदेश में बैठे अमेरिकी नागरिक आसानी से झांसे में आ जाते थे।

🕵️♂️ ठगी का मास्टर प्लान: 3 लेयर्स में काम करती थी टीम
पुलिस जांच में सामने आया है कि अमेरिकी नागरिकों को जाल में फंसाने के लिए इस गैंग ने अपने काम को 3 अलग-अलग खतरनाक लेयर्स (Teams) में बांट रखा था:
- लेयर 1: डायलर टीम (Dialer Team): ऑनलाइन शॉपिंग के बाद जो लोग गूगल पर रिफंड या कस्टमर केयर सर्च करते थे, उनका डेटा इस टीम के पास आ जाता था। यह टीम ‘डॉलर’ नाम के ऐप के जरिए उन्हें कॉल करके या फ्रॉड मैसेज भेजकर जाल में फंसाती थी।
- लेयर 2: बैंकर टीम (Banker Team): डायलर टीम से बात होने के बाद कॉल इस टीम को ट्रांसफर होती थी। ये खुद को अमेरिकी सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बताते थे और पीड़ितों को डराते थे कि उनका सोशल सिक्योरिटी नंबर फ्रीज या सील होने वाला है।
- लेयर 3: क्लॉथ/क्लोजर टीम (Closer Team): पूरी तरह डर चुके अमेरिकी नागरिक को यह टीम मुसीबत से बचाने का झांसा देती थी। वे पीड़ित से कहते थे कि अपना पूरा बैंक बैलेंस निकालकर गिफ्ट वाउचर या क्रिप्टोकरेंसी में ट्रांसफर कर दें।
हवाला के जरिए भारत आता था पैसा अमेरिकी नागरिकों से खरीदे गए गिफ्ट वाउचर्स और क्रिप्टोकरेंसी को यह गैंग बाद में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिडीम करा लेता था। इसके बाद यह पूरा पैसा ‘हवाला’ नेटवर्क के जरिए भारत पहुँचाया जाता था।

🎓 हाई-प्रोफाइल ठग: बीटेक, एलएलबी और प्लास्टिक इंजीनियर कर रहे थे नौकरी
हैरानी की बात यह है कि इस इंटरनेशनल फ्रॉड गैंग में देश के कोने-कोने (गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड, नागालैंड और मणिपुर) से आए बेहद पढ़े-लिखे युवा शामिल थे। गिरफ्तार किए गए लोगों में:
- ललित खैराजानी (ऑपरेशन मैनेजर): अहमदाबाद का रहने वाला बीकॉम ग्रेजुएट।
- नवीन कुमार: रांची का रहने वाला एलएलबी (कानून) की डिग्री धारक।
- मुकेश शुक्ला: गोरखपुर का बीटेक पास इंजीनियर।
- सिद्धार्थ ठाकुर व हर्ष शर्मा: देहरादून और राजस्थान के बीबीए व बीएससी ग्रेजुएट।
- यानशुमथुंग यानथन: नागालैंड का प्लास्टिक इंजीनियर।
इसके अलावा कई 10वीं-12वीं पास युवाओं को भी सिर्फ उनकी अच्छी अंग्रेजी और कंप्यूटर स्पीड के कारण कॉलिंग के काम पर रखा गया था। पकड़े गए सभी आरोपियों को अच्छे से पता था कि वे ठगी का धंधा कर रहे हैं, लेकिन ज्यादा पैसों के लालच में वे इस अपराध का हिस्सा बने रहे।

🚨 गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को भेजी जाएगी रिपोर्ट
चूंकि यह मामला सीधे तौर पर अमेरिकी नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम से जुड़ा है, इसलिए लखनऊ पुलिस प्रशासन अब इसकी पूरी विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को भेजने की तैयारी में है। इसके बाद इस रिपोर्ट को विदेश मंत्रालय को फॉरवर्ड किया जाएगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके। पुलिस अब फरार मुख्य सरगना और ट्रांजैक्शन चेन की तलाश में जुटी है।
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