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नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षाओं—नीट (NEET) और जेईई (JEE) के जरिए होने वाली एडमिशन प्रक्रिया में आने वाले दिनों में एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकता है। नई शिक्षा नीति (NEEP) के तहत अब मेडिकल और इंजीनियरिंग के एडमिशन में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के अंकों (Marks) को 50 प्रतिशत वेटेज (महत्व) देने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
पीटीआई (PTI) के सूत्रों के अनुसार, इस ऐतिहासिक कदम का मुख्य उद्देश्य छात्रों के ऊपर से किसी एक प्रवेश परीक्षा के भारी दबाव को कम करना और कोचिंग सेंटरों पर उनकी बढ़ती निर्भरता पर लगाम लगाना है।
🔥 इस बड़े बदलाव की 5 सबसे मुख्य बातें (Key Highlights):
- बोर्ड मार्क्स को 50% वेटेज: अब केवल एंट्रेंस टेस्ट के स्कोर से एडमिशन नहीं होगा, बल्कि 12वीं बोर्ड परीक्षा के नंबर भी मेरिट लिस्ट में 50% भूमिका निभाएंगे।
- कोचिंग पर निर्भरता होगी कम: एंट्रेंस टेस्ट के सिलेबस को पूरी तरह से स्कूल पाठ्यक्रम (NCERT/Board Syllabus) के साथ बेहतर ढंग से जोड़ा जाएगा ताकि छात्रों को अलग से महंगी कोचिंग न करनी पड़े।
- मल्टीपल चांस (कई बार परीक्षा): छात्रों को साल में एक से अधिक बार एग्जाम देने का मौका मिल सकता है।
- ऑन-डिमांड कंप्यूटर टेस्ट: परीक्षा प्रणाली को धीरे-धीरे ‘अडैप्टिव ऑन-डिमांड कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट’ (CBT) की ओर ले जाने की योजना है।
- ‘डमी स्कूलों’ पर कसेगा शिकंजा: बिना स्कूल जाए सिर्फ कोचिंग के दम पर परीक्षा देने वाले “डमी स्कूलों” के बढ़ते चलन की भी कड़ी जांच की जा रही है।

❓ आखिर क्यों लिया जा रहा है यह बड़ा फैसला?
पिछले कुछ समय में देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक, मूल्यांकन में गलतियां और कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिससे पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं। इसके अलावा, डमी स्कूलों और कोचिंग सेंटरों के दबाव के कारण छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा था।
वर्तमान व्यवस्था में बोर्ड परीक्षाओं के नंबर सिर्फ एक पात्रता (Eligibility) मानदंड होते हैं, लेकिन नया नियम लागू होने के बाद बोर्ड परीक्षा और स्कूल की पढ़ाई की अहमियत बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी।
🗓️ कब आएगी शिक्षा मंत्रालय की फाइनल रिपोर्ट?
इस पूरे शिक्षा सुधार का खाका तैयार करने के लिए शिक्षा मंत्रालय की 9-सदस्यीय विशेष समिति लगातार काम कर रही है। इस पैनल का गठन पिछले वर्ष किया गया था, जिसका कार्यक्षेत्र परीक्षाओं में पारदर्शिता लाना और कोचिंग के बढ़ते जाल की समीक्षा करना है।
कुछ हफ्तों में सौंपी जाएगी रिपोर्ट सूत्रों के मुताबिक, इस उच्च स्तरीय समिति की अंतिम रिपोर्ट आने वाले कुछ ही हफ्तों में सरकार को सौंपी जा सकती है। इसके बाद केंद्र सरकार इन सिफारिशों को देश भर में लागू करने पर अंतिम मुहर लगाएगी।

🧠 एक नज़र: क्या हैं JEE और NEET परीक्षाएं?
- संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE): यह परीक्षा उन छात्रों के लिए होती है जो 12वीं के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहते हैं। इसके जरिए देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों जैसे IIT, NIT और ट्रिपल आईटी (IIITs) में प्रवेश मिलता है। इसमें मुख्य रूप से गणित, भौतिकी (Physics) और रसायन विज्ञान (Chemistry) के सवाल पूछे जाते हैं।
- राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET): यह परीक्षा डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले छात्रों के लिए होती है। इसके स्कोर के आधार पर देश भर के मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS और अन्य मेडिकल कोर्सों में दाखिला मिलता है। इसमें भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीवविज्ञान (Biology) से प्रश्न पूछे जाते हैं।
ये दोनों ही देश की सबसे कठिन और प्रतिस्पर्धी परीक्षाएं मानी जाती हैं, जिनमें हर साल लाखों छात्र अपनी किस्मत आजमाते हैं।
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