बड़ी तैयारी: अब ज्वेलर्स के पास जमा करा सकेंगे घर का सोना! मिलेगी बैंक लॉकर जैसी सुरक्षा और 2.5% तक ब्याज; जल्द आएगी नई ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम’

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drnewsindia.com

Business News Today: भारतीय परिवारों और महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ी और काम की ख़बर है। अब आप अपने घर में रखे सोने (Gold) को बैंक लॉकर की तरह अपने नजदीकी ज्वेलर्स (सर्राफा व्यापारियों) के पास भी सुरक्षित जमा करा सकेंगे। खास बात यह है कि इस सोने पर आपको 2.5% तक का सालाना ब्याज भी मिलेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार अगले दो हफ्तों के भीतर एक नई और पूरी तरह अपडेटेड ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम’ (Gold Monetization Scheme) का एलान करने जा रही है।

📌 नई स्कीम की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • 🤝 ज्वेलर्स बनेंगे पार्टनर: पहली बार देश के सर्राफा व्यापारियों को ‘कलेक्शन पार्टनर्स’ के रूप में शामिल किया जाएगा, जिससे आम लोगों के लिए सोना जमा करना आसान होगा।
  • 💰 ब्याज दर: जमा सोने पर उपभोक्ताओं को 2.25% से लेकर 2.5% तक का सालाना ब्याज मिलने की उम्मीद है।
  • 🎯 सरकार का लक्ष्य: इस नए फ्रेमवर्क के जरिए देश के घरेलू बाजार से 1,000 टन से ज्यादा सोना जुटाने का लक्ष्य है।
  • 📈 अर्थव्यवस्था को बूस्ट: यदि भारतीयों के कुल सोने का सिर्फ 5% हिस्सा भी इस स्कीम में आता है, तो बाजार में करीब $90 अरब (₹8.57 लाख करोड़) की नकदी आएगी। इससे अगले 2 साल तक भारत को बाहर से सोना नहीं मंगाया पड़ेगा।

🏛️ भारतीयों के पास कुबेर का खजाना: घर और मंदिरों में है 50,000 टन सोना

व्यापारियों के प्रमुख संगठन एसोचैम (ASSOCHAM) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय घरों और मंदिरों में अनुमानित 50,000 टन सोना रखा हुआ है।

  • कुल वैल्यू: अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 10 ट्रिलियन डॉलर (लगभग ₹830 लाख करोड़) है।
  • तुलना: यह विशाल भंडार दुनिया के शीर्ष 10 सेंट्रल बैंकों के कुल रिजर्व से भी कहीं ज्यादा है। अमेरिका और चीन को छोड़ दिया जाए, तो भारतीयों के पास मौजूद सोने की कीमत दुनिया के लगभग हर देश की सालाना जीडीपी (GDP) से अधिक है।

📊 हर महीने ₹57 हजार करोड़ का आयात भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर है। वित्त वर्ष 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने हर महीने औसतन 60 टन सोना इम्पोर्ट (आयात) किया है। इसके लिए हर महीने करीब 6 बिलियन डॉलर यानी लगभग 57,000 करोड़ रुपए विदेशी मुद्रा के रूप में बाहर भेजने पड़ते हैं, जिससे रुपए पर दबाव बनता है।

🔍 पुरानी स्कीम का रिपोर्ट कार्ड: 10 साल में 25,000 टन में से सिर्फ 38 टन सोना आया

सरकार ने साल 2015 में सोने का आयात कम करने के लिए ऐसी ही एक योजना शुरू की थी, लेकिन वह बुरी तरह फ्लॉप रही। 10 वर्षों में देश के घरों में मौजूद 25,000 टन सोने में से केवल 38 टन सोना ही बैंकों तक पहुँच पाया।

पुरानी स्कीम फेल होने के 4 बड़े कारण:

  1. ⚖️ टैक्स और पूछताछ का डर: लोगों के मन में सबसे बड़ा डर यह रहता है कि घर में रखे पुश्तैनी सोने को बैंक ले जाने पर आयकर विभाग (Income Tax) की स्क्रूटनी शुरू हो जाएगी और सरकार पुराने बिल या कागजात मांगेगी।
  2. ❤️ गहनों से भावनात्मक लगाव: भारतीय परिवारों का अपने पुराने और पारंपरिक आभूषणों से गहरा भावनात्मक व धार्मिक लगाव होता है। थोड़े से ब्याज के लिए वे अपने पुरखों की निशानियों को पिघलाना नहीं चाहते।
  3. 📉 सरकारी खजाने पर डबल मार: एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पुरानी योजना में सरकार को 2% ब्याज देने के साथ-साथ मैच्योरिटी के समय सोने के बढ़े हुए दाम भी अपनी जेब से भरने पड़ते थे। हेजिंग (सुरक्षित इंतजाम) न होने से सरकार को नुकसान हुआ।
  4. 🏦 बैंकों की कम दिलचस्पी: कमर्शियल बैंकों को इस योजना को आगे बढ़ाने में कोई बड़ा वित्तीय फायदा या कमीशन नहीं दिख रहा था, इसलिए उन्होंने इसकी मार्केटिंग में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।

💸 वर्तमान भाव पर एक नजर (Gold Price Today)

भारतीय सराफा एजेंसियों और कमोडिटी मार्केट के अनुसार, घरेलू बाजार में सोने की वर्तमान कीमतें इस प्रकार ट्रेंड कर रही हैं:

  • 24 कैरेट सोना (प्रति 10 ग्राम): ₹72,450* (स्थानीय टैक्स और मेकिंग चार्ज अलग)
  • 22 कैरेट सोना (प्रति 10 ग्राम): ₹66,410*

स्रोत: ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) एवं एसोचैम (ASSOCHAM) इंडिया द्वारा जारी आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट।

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