drnewsindia.com
नई दिल्ली। दिल्ली प्रीमियर लीग (DPL) के मुकाबले के दौरान फील्ड अंपायर धर्मेश भारद्वाज गंभीर रूप से चोटिल हो गए। सोमवार रात अरुण जेटली स्टेडियम में न्यू दिल्ली टाइगर्स और ईस्ट दिल्ली राइडर्स के बीच मुकाबला चल रहा था। इसी दौरान टाइगर्स की पारी के 18वें ओवर में बल्लेबाज लक्ष्य थरेजा का तेज शॉट सीधे अंपायर धर्मेश भारद्वाज के चेहरे पर जा लगा।
गेंद इतनी तेज गति से आई कि धर्मेश को संभलने या बचने का मौका नहीं मिला। गेंद लगते ही वे मैदान पर गिर पड़े। घटना के तुरंत बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें ICU में भर्ती किया। घटना की जानकारी मंगलवार को सामने आई।
पहले भी चोटिल हो चुके हैं धर्मेश
धर्मेश भारद्वाज DPL के दौरान इससे पहले भी चोटिल हो चुके हैं। पिछले मुकाबले में उनके कंधे पर गेंद लगी थी। अब दोबारा गेंद लगने की घटना के बाद क्रिकेट मैदान पर अंपायरों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

राइडर्स ने 36 रन से जीता मुकाबला
मैच में ईस्ट दिल्ली राइडर्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट पर 192 रन बनाए। मयंक रावत ने 40 रन की पारी खेली। न्यू दिल्ली टाइगर्स की ओर से ऋषभ शर्मा ने 34 रन देकर 3 विकेट लिए।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यू दिल्ली टाइगर्स की टीम 156 रन पर ऑलआउट हो गई। कप्तान हिम्मत सिंह ने 31 रन बनाए। राइडर्स की ओर से आशीष मीना ने 3 और मयंक यादव ने 2 विकेट लिए। ईस्ट दिल्ली राइडर्स ने मुकाबला 36 रन से अपने नाम किया।
गेंद लगने से अंपायरों की मौत के मामले भी
क्रिकेट में अंपायरों के गेंद से चोटिल होने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। कुछ मामलों में चोट जानलेवा भी साबित हुई है। नवंबर 2014 में इजरायल के अंपायर हिलेल ऑस्कर की मैच के दौरान गेंद लगने से मौत हो गई थी। 2009 में वेल्स में 72 वर्षीय अंपायर एल्कविन जेनकिंस की भी गेंद लगने से मौत हुई थी। 2019 में ब्रिटेन के 80 वर्षीय अंपायर जॉन विलियम्स ने भी मैच के दौरान गेंद लगने के बाद जान गंवाई थी।

अंपायरों के लिए सेफ्टी गियर की मांग
गेंद की रफ्तार और बल्लेबाजों के शक्तिशाली शॉट को देखते हुए अंपायरों की सुरक्षा लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। कई मुकाबलों में अंपायर हेलमेट और अन्य सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करते दिखाई दिए हैं। IPL के कुछ मैचों में अंपायरों ने हाथ और शरीर के संवेदनशील हिस्सों की सुरक्षा के लिए गार्ड भी पहने हैं।
धर्मेश भारद्वाज के साथ हुई घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि बल्लेबाजों के साथ-साथ मैदान पर खड़े अंपायरों की सुरक्षा के लिए भी सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल को कितना जरूरी बनाया जाना चाहिए।




