‘मिनी जगन्नाथपुरी’ मानोरा धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब: 22 फीट ऊंचे लकड़ी के रथ पर नगर भ्रमण पर निकले महाप्रभु; जानें 200 साल पुरानी अनोखी परंपरा

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Vidisha Desk (16 July 2026): मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मानोरा धाम में गुरुवार को भगवान जगदीश स्वामी की भव्य रथयात्रा पूरी श्रद्धा, अटूट आस्था और अभूतपूर्व उत्साह के साथ निकाली गई। प्रदेशभर में ‘मिनी जगन्नाथपुरी’ के नाम से विख्यात मानोरा धाम में भगवान जगदीश स्वामी (जगन्नाथ), उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा 22 फीट ऊंचे दो मंजिला विशाल लकड़ी के रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले।

इस ऐतिहासिक और अलौकिक पल का साक्षी बनने और महाप्रभु के दर्शन करने के लिए विदिशा सहित आसपास के कई जिलों से लाखों श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। पूरे क्षेत्र में जय जगन्नाथ के जयघोष से आसमान गूंज उठा।

📌 मानोरा रथयात्रा की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • 🎡 भव्य दो मंजिला रथ: 22 फीट ऊंचे पारंपरिक लकड़ी के रथ पर सवार होकर निकले भगवान।
  • 🌟 मिनी जगन्नाथपुरी: मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा और अनोखा जगन्नाथ उत्सव।
  • 📜 200 वर्ष पुरानी परंपरा: भक्त मानकचंद्र और माता पदमावती की भक्ति से जुड़ी है पावन कथा।
  • 🌸 पलक-पावड़े बिछाए: पूरे मानोरा गांव को रंग-बिरंगी रोशनी और ध्वज-पताकाओं से सजाकर की गई पुष्पवर्षा।

🚨 वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुरू हुआ सफर, लाखों ने उतारी आरती

गुरुवार सुबह से ही मानोरा धाम में धार्मिक अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया था।

  • रथ पर विराजित हुए भगवान: मुख्य मंदिर के गर्भगृह से पूर्ण वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच भगवान के विग्रहों को भव्य रथ पर लाकर विराजित किया गया।
  • भक्तिमय माहौल: इसके बाद जैसे ही रथ आगे बढ़ा, श्रद्धालुओं में रथ की डोर खींचने की होड़ मच गई। यात्रा के पूरे रूट पर श्रद्धालुओं ने जगह-जगह मंच बनाकर भगवान की पूजा-अर्चना की, महाआरती उतारी और प्रसादी बांटी।

🗺️ जगन्नाथ पुरी से सीधा संबंध: जानिए क्या है मानोरा धाम का चमत्कारी इतिहास?

मानोरा धाम की यह रथयात्रा पिछले दो सौ सालों से चली आ रही है और इसका संबंध सीधे ओडिशा के मुख्य जगन्नाथ पुरी मंदिर से माना जाता है:

शंकराचार्य की घोषणा: ऐसी मान्यता है कि जब ओडिशा के जगन्नाथ पुरी में रथयात्रा के दौरान भगवान का मुख्य रथ कुछ क्षणों के लिए रुकता है, तब पुरी के शंकराचार्य यह घोषणा करते हैं कि महाप्रभु इस समय मध्य प्रदेश के मानोरा धाम पधार चुके हैं। इसी दिव्य घोषणा के साथ मानोरा में उत्सव की शुरुआत होती है, जहां अगले तीन दिनों तक श्रद्धालु भगवान के अनन्य रूप के दर्शन करते हैं।

📜 भक्त मानकचंद्र और पदमावती को मिला था भगवान का वचन

इस ऐतिहासिक परंपरा के पीछे की कथा बेहद रोचक है। मान्यताओं के अनुसार:

  • लगभग 200 वर्ष पूर्व मानोरा गांव के परम भक्त मानकचंद्र और उनकी पत्नी पदमावती पैदल जगन्नाथ पुरी की यात्रा पर गए थे।
  • उनकी कठिन तपस्या और निश्छल भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान जगन्नाथ ने उन्हें स्वप्न में प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन मानोरा आकर साक्षात दर्शन देने का वचन दिया था।
  • तभी से इस पावन तिथि पर मानोरा धाम में पुरी की तर्ज पर ही रथयात्रा निकालने की परंपरा चली आ रही है, जिसका निर्वहन आज भी पूरी शुद्धता और श्रद्धा के साथ किया जाता है।

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